Monday, August 12, 2013

कुछ यूँ ही बेवजह.........

बदल कर रस्ते पल पल
कौन सी मंजिल की तलाश है
रिश्ते भी  मौसमो की फितरत हुए जाते हैं!

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पढ़ लेना ख़ामोशी को
धीरे से छु लेना साँसे
कुछ ख्वाइशें किस कदर मासूम होती है !!
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बदल लिया रास्ता
 अनदेखा कर के

तौबा !!तुम्हे तो ठीक से रूठना भी न आया
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डायरी , पन्ने उसमे रखे कुछ निशाँ
पढ़ लेती हैं नजरे आज भी अनकही बातें

इन्ही यादो से तो कोई दिल के करीब रहता है !!
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20 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ।

yashoda agrawal said...

आपने लिखा....
हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए बुधवार 14/08/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!

mahendra mishra said...

बदल लिया रास्ता अनदेखा कर के
तौबा !!तुम्हे तो ठीक से रूठना भी न आया

भावपूर्ण रचना अभिव्यक्ति … आभार

mahendra mishra said...

बदल लिया रास्ता
अनदेखा कर के

तौबा !!तुम्हे तो ठीक से रूठना भी न आया

भावपूर्ण रचना … आभार

SAMEER said...

बहुत सुन्दर...अनगिनत हृदय का सच..!

SAMEER said...

बहुत सुन्दर....अनेकों हृदय का एहसास..!

अरुन शर्मा अनन्त said...

आपकी यह रचना कल मंगलवार (12-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

धीरेन्द्र अस्थाना said...

bahut bhavpoorn .

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत प्रस्तुती......

दिल की आवाज़ said...

खूबसूरत अहसास ...

दिगम्बर नासवा said...

बदल लिया रास्ता
अनदेखा कर के

तौबा !!तुम्हे तो ठीक से रूठना भी न आया ..

बहुत खूब ... बस वाह ही निकल आई अनायास ...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही लाजवाब.

रामराम.

आशा जोगळेकर said...

पढ लेती हैं नजरें आज भी अन कही बातें ।
बहुत सुंदर, रंजू जी ।

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब, बेहतरीन..

प्रवीण पाण्डेय said...

स्मृतियाँ रह रह बरसेंगी।

प्रतिभा सक्सेना said...

बहुत बढ़िया !

रश्मि शर्मा said...

बहुत सुंदर..आप हमेशा अच्‍छा लि‍खती हैं

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत खूब

स्‍वतंत्रता दि‍वस की शुभकामनाएँ

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर..

gurpreet singh Butter said...

खूबसुरत पंक्तिया मन को छू गयी।

www.yuvaam.blogspot.com