बदल कर रस्ते पल पल
कौन सी मंजिल की तलाश है
रिश्ते भी मौसमो की फितरत हुए जाते हैं!
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पढ़ लेना ख़ामोशी को
धीरे से छु लेना साँसे
कुछ ख्वाइशें किस कदर मासूम होती है !!****************
बदल लिया रास्ता
अनदेखा कर के
तौबा !!तुम्हे तो ठीक से रूठना भी न आया
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डायरी , पन्ने उसमे रखे कुछ निशाँ
पढ़ लेती हैं नजरे आज भी अनकही बातें
इन्ही यादो से तो कोई दिल के करीब रहता है !!
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