Wednesday, January 25, 2012

खोये हुए पल

बीते वो लम्हे
जो सुख से भरे थे
हरियाले से वह पत्ते
अब क्यों पीले पड़ चले हैं
पर अब भी याद है
उन पलों की सोंधी सोंधी
जब सिर्फ़ तुम्हारे छूने भर से
देह तपने लगती थी
लगती थी तपते होंठी की मोहर जब
कभी गर्दन और काँधे पर
तो झनझना के देह थिरक उठती थी

उठने लगती थी ऐसी हिलोरें
दोनों तरफ़ जैसे
कोई नदिया मचल के उमड़ती थी

पर आज वही है हम दोनों
साँसे भी वहीँ है
काँधे पर ठहरा है
कोई पुरानी याद का बोसा
और तेरी मेरी उलझी यादे कई हैं
पर न जाने कहाँ खो गया
वह सम्पदन
न जाने वह मिलने की
खुशी कहाँ गुम हुई है  

सोख लिया सब रस
इस जीवन नदिया से
हमारी भागती दोड़ती जरूरतों ने
और जीवन का वह अनमोल पल
कहीं छिटक कर खो गया है ...

Monday, January 16, 2012

बात दिल की फ़िर होंठों तक आ कर रह गई

बदली दर्द की बरस कर पलकों पर रह गई
बात दिल की फ़िर होंठों तक आ कर रह गई
 
टूटी न खामोशी आज भी पहली रातों की तरह
ख्वाव उजले लिये यह रात भी काली रह गई
 
बेबसी धडकी बेचैन तमन्ना बन कर  दिल में
तन्हा सांसे फ़िर से तन्हाई में घुल कर रह गई
 
खुल के  इजहार करू न  आया वह बहारों का मौसम
आज खामोशी मेरी मुझे खिंजा सी चुभ कर रह गई

Monday, January 09, 2012

खुदे हुए नाम




पुराने किले की
खंडहर हुई दीवारों
और सदियों से स्तब्ध
पेड़ों के तने
पर खुदे
हुए कई नामो को
देख कर सोचती हूँ
क्या प्रेमियों के
यह खुदे हुए नाम
प्रेम की उम्र भी बढ़ा देते हैं ..?


1 janwari 2012  को सफदरजंग टोम्ब को देखते हुए ...यूँ ही ध्यान में आई कुछ पंक्तियाँ

Monday, January 02, 2012

दो पल....

सुनो
अपने आने की ख़बर
कुछ देना इस तरह मुझको
जैसे मन्दिर की घंटियाँ
टुनटुना उठती हैं
और एक पावन सुगंध
फ़ैल जाती है
फिजा में

इस दो पल के मिलने में ही
मैं अपने जीवन के
सब पल काट लूंगी
जैसे दो पल के ध्यान में
हो जाती है सब मुरादें पुरी
और दो दाने प्रसाद
के पा कर रूह तक
पावन हो जाती है!!!!

सभी दोस्तों को नया साल मुबारक ....स्वागत है २०१२ का खुली बाहों से ..सब मंगलमय हो ,सुखद हो ....प्रेम से भरा हुआ हो यह साल ......

Friday, December 23, 2011

चलो मिल कर ज़िंदगी को मीठे केक सा कर जाए

क्रिसमिस का प्यारा सा त्योहार
चलो मिल कर ज़िंदगी को मीठे केक सा कर जाए


आओ सिखाएं आपको इस केक को बनाना
इसके लिए जरा यह सब सामान तो ले के आना    

एक कप प्यार , में १०० ग्राम दयालुता ,
५०० ग्राम दुआ [प्रार्थना ] मिला के इसको नरम बनने तक हिलाना
फ़िर इस में १५० ग्राम भावना त्याग की ,
और १०० चम्मच मदद सबके लिए ५ मिनट तक रख जाना
अब इस में  १०० बूंदे मुस्कराहट की
१ चम्मच  सहन शक्ति के साथ अच्छे से
इन सबको  मिला के फ़िर इसको पकाना

 अब देखो इन सब चीजों को मिला के
ज़िंदगी  का स्वाद है कितना मीठा
सबको प्यार से अपने अब यही केक तुम खिलाना


तो था न यह बहुत अच्छा सा केक ...क्रिसमिस आते ही केक के साथ साथ याद आते हैं सांता क्लाज ..सांता क्लाज आया ढेर से तोहफे लाया ..:) क्रिसमस का त्योहार आते ही बच्चो की खुशी का ठिकाना नही रहता सांता क्लाज  आयेंगे ढेर से तोहफे लायेंगे यही उम्मीद लिए सारी दुनिया के बच्चे इनका इंतज़ार करते हैं शायद ही दुनिया का कोई बच्चा ऐसा होगा जिसे इनका इंतज़ार न होगा दुनिया भर का प्यार समेटे अपनी झोली में यह आते हैं और बच्चो को इंतज़ार होता है अपने तोहफों का जो वो चिठ्ठी [पाती] लिख के अपनी मांग उनको लिख के भेजते हैं .क्या आप जानते हैं की सांता क्लाज को हर साल कितनी पाती मिलती है आपको यकीन नही होगा लेकिन यह सच है की हर साल उन्हें ६० लाख से भी ज्यादा पाती मिलती है और
सांता उनका जवाब देते हैं . सयुंक्त राष्ट्रीय की  यूनीवर्सल   पोस्ट यूनियन के अनुसार सांता क्लाज़ को ढेरों नन्हें मुन्ने बच्चों की  पाती मिलती हैं सांता कितने लोकप्रिय हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि कम से कम २० देशों के डाक विभाग सांता के नाम से आने वाली चिट्ठियों  को अलग करने और फ़िर उनका जवाब देने के लिए अलग से कर्मचारी भरती करते हैं .....कई पाती पर तो सिर्फ़ इतना ही लिखा होता है सांता क्लाज़ नॉर्थ पोल ..इन चिट्ठियों का  दिसम्बर में तो अम्बार लग जाता है कनाडा  डाक विभाग २६ भाषा में इनका जवाब देता है जबकि जर्मनी  कि डयुश    पोस्ट  १६ भाषा में  इन का जवाब देती है कुछ देशो में तो इ मेल से भी जवाब दिए जाते हैं पर सांता रहते कहाँ है यह  अभी साफ साफ नही पता चल पाया है :)पर कनाडा और फ्रांस के डाक कर्मी सबसे ज्यादा व्यस्त  रहते हैं क्यूंकि इन दोनों देशों  में १० लाख से भी ज्यादा नन्हें मुन्ने चिट्ठी लिखते हैं
सर्दियों में मनाया जाने वाला यह त्योहार लगभग सभी देशों में मनाया जाता है लेकिन सांता को कई नामों से जाना जाता है कहीं फादर क्रिसमस तो कहीं सेंट निकोलस ,रूस में इन्हे डेड मोराज़ के नाम से जाना जाता है

1)_यह तो हम सभी जानते हैं कि क्रिसमिस पर सबको उपहार देने की परम्परा है लोग तरह तरह के उपहार देते हैं ..पर एक उपहार अब तक का सबसे व्यक्तिगत उपहार माना जाता है...वह था १९६९ की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अरबपति अमेरिकी व्यवसायी रास  पैरेट ने वियतनाम में अमेरिकी युद्धबंदियों के लिए ईमान सेवा से २८ टन दवाइयां और उपहार भिजवाये थे |यह अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत  उपहार माना जाता है |

2)नेशनल क्रिसमिस ट्री एसोसिएशन के अनुसार अमेरिका में हर साल ३७.१ मिलियन क्रिसमिस ट्री खरीदे जाते हैं |अमेरिका का राष्ट्रीय क्रिसमिस वृक्ष कैलोफोर्निया के किंग कैनन नॅशनल पार्क में हैं | ३०० फीट ऊँचे इस सिकाओ वृक्ष को यह दर्जा १९२५ में दिया गया |

3) पूरी दुनिया में    क्रिसमस २५ दिसम्बर को मनाया जाता है पर सिर्फ़ यूक्रेन में यह ७ जनवरी को मनाया जाता है इसकी वजह यह है कि यहाँ पर रोमन कैथोलिक गेग्रोरियन कैलेंडर के साथ ही आर्थोडाक्स जुलियन कैलेंडर भी समान रूप से प्रचलित है

यूक्रेन   का क्रिसमस कुछ और कारणों से भी बहुत ख़ास है ..यहाँ क्रिसमस ट्री पर नकली मकडी और उसका जाल सजाया जाता है इस से यह माना जाता है कि घर में सोभाग्य आता है | यहाँ क्रिसमिस की रात घरों में दावत की जबरदस्त तैयारी होती है और घर का सबसे छोटा बच्चा इवनिंग स्टार को देखने के बाद पार्टी शुरू करने का संकेत देता है

4)ग्रीस में क्रिसमिस ट्री को सजाने और उपहार देने की परम्परा नहीं है | क्रिसमिस की सुबह स्थानीय पादरी गांव के तालाब  में एक छोटा सा क्रास इस विश्वास के साथ फेंकता है  कि वह अपने साथ बुरी आत्माओं को भी डुबो देगा | इस के बाद पादरी गांव  के घर घर जा कर पवित्र जल फेंकते हैं ताकि घर से बुरी आत्माएं निकल जाए | इस बुरी आत्माओं को भगाने के प्रयास में ही वहां के लोग पुराना जूता या नमक जलाते हैं |

5)नार्वे में क्रिसमस पर रात्री भोज और उपहार को खोलने के बाद घर के झाडू को छुपा दिया जाता है |इस के पीछे यह मान्यता है कि हर रात बुरी आत्माएं  बाहर निकलती है और वह झाडू को चुरा कर उस पर सैर करती हैं |

6)अमेरिका में बच्चे क्रिसमिस की रात सांता क्लाज से उपहार लेने के लिए जुराबे टांग  देते हैं   तो नीदरलैंड में बच्चे नवम्बर से ही अपने जुटे इस विश्वास के साथ टांग देते हैं घर के बाहर की सांता क्लाज उन्हें उपहार दे जायेंगे |

इस तरह क्रिसमिस के रंग हर देश में खूब नए तरीके से मनाये जाते हैं ..किसी भी तरह मनाया जाए पर    यह बच्चो को तो बहुत ही प्यारा त्यौहार लगता है क्यों कि बहुत सारे उपहार जो मिलते हैं ...


Thursday, December 15, 2011

दावा ...

दावा ...

उँगलियों से लिपटे
उलझती ...
वक़्त की गिरह में
लिपटी कुछ यादें
और कुछ बातें
जो दावा करती है
तेरे बहुत करीब होने का
पर ...........
कभी पूछ नहीं पायी
तुमसे ......
वह छोटी छोटी बातें
जो अक्सर
बेफजूल हुआ करती है
कि ....तुम्हे क्या पसंद है ?
बरसात में भीगना ?
रोशनदान से छनती
आती रोशनी का
धीरे से गुदगुदाना
मुक्त गगन में
एक जुट कबूतरों के
झुण्ड का उड़ना
सर्दियों की सुबह की
गिरती ओस में भीगना
किस करवट सोना
और क्या भाता है तुम्हे
यूँ ही बेमतलब
मेरी तरह से ठहाके लगाना ?
सच कितनी छोटी छोटी बातें
कभी नहीं पूछ पाया
यह  मन ....
जो तुमसे जुड़े रहने का
हर वक़्त दावा करता है ..!!!

Friday, December 09, 2011

मरने से पहले चलो फ़िर से जी जाएं

बदल गया वक्त क्यों इस तरह कैसे बताये
फूले भी चुभे शूल से किस्सा कैसे यह बतलाये

फासले तो थे न इतने जितनी बन गयीं दूरियाँ
क्यों खींच गई दीवारे  कैसे दिल को समझाए

बागों में तो आने को था बसंत का मौसम
क्यों छा गई खिजाएँ कैसे राग कोई गाए

वक्त की कलाई है सख्त पत्थर जैसी
कांच के ख्वाबों  को वहाँ कैसे बसाए

करे जज्बा वही पैदा फ़िर से मोहब्बत का
इस तरह मरने से पहले चलो फ़िर से जी जाएं !!