Thursday, January 26, 2023

खालीपन

 


खालीपन

जब भी खाना बनाती हूं

तो सामने वाले घर में भी वो भी खाना बना रही होती है

आमने सामने की खिड़की से अक्सर एक दूसरे को देखते हैं हम

जानती नहीं मैं उसे

पर जैसे हमारी आंखें बात कर रही होती हैं

क्या बनाया आज? क्या उन्हें पसंद आएगा? क्या बच्चे खाएंगे?

फिर एक खामोशी ,फिर नजरों का मिलना और पूछना

क्यों परिवार होते हुए भी अकेले हैं हम?

आंखों में खालीपन  क्यों है, इधर भी उधर भी?

आखिर किसको ढूंढा रहे हैं इस खिड़की से बाहर झंकते हुए हम?

इन्हीं सवालों के साथ खिड़की यहां भी बंद और वहां भी बंद


नीचे लिंक पर आप सुन भी सकते हैं 

Written by my daughter megha sahgal



बदला रंग मौसम का

 बदला रंग मौसम का



ली अंगडाई

सर्दी ने ....

मौसम की

बुदबुदाहट में ...

हवा के

खिलते झोंकों से ..

बहती मीठी बयार से

फ़िर पूछा है ..

प्रेम राही का पता


खिलते

पीले सरसों के फूल सा

आँखों में ...

हंसने लगा बसंत

होंठो पर

थरथराने लगा

गीत फ़िर से

मधुमास का ..

अंगों में चटक उठा

फ्लाश का चटक रंग

रोम रोम में

पुलकित हो उठा

अमलतास ...

कचनार सा दिल

फ़िर से जैसे बचपन हो गया


कैसा यह बदला

रंग मौसम का

अल्हड सा

हर पल हो गया......


बसंत पंचमी की आप सभी को बहुत बहुत बधाई 


 Ranju Bhatia...

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जश्न जारी है

 इमरोज़ होना आसान नहीं ...



इमरोज़ का जन्मदिन


Amrita Pritam ke saath चालीस साल जी कर लिखी 

इमरोज़ की कविताएं


"जश्न जारी है" जी की किताब से कुछ सुंदर रचनाएं


तेरे साथ जिए

वे सब खूबसूरत

दिन रात

अब अपने आप

मेरी कविताएं

बनते जा रहे हैं....


कब  और किस दिशा में कुछ सामने आएगा ,कोई सवाल पूछेगा ,यह रहस्य पकड़ में नही आता ..एक बार मोहब्बत और दर्द के सारे एहसास ,सघन हो कर आग की तरह लपट से पास आए और इश्क का एक आकार ले लिया ..


उसने पूछा ..कैसी हो ? ज़िन्दगी के दिन कैसे गुजरते रहे ?


जवाब दिया ..तेरे कुछ सपने थे .मैं उनके हाथों पर मेहन्दी रचाती रही .

उसने पूछा ..लेकिन यह आँखों में पानी  क्यों है ?


कहा ..यह आंसू नही सितारे हैं ...इनसे तेरी जुल्फे सजाती रही ..


उसने पूछा ...इस आग को कैसे संभाल कर रखा ?


जवाब दिया ...काया की डलिया में छिपाती रही


उसने पूछा -बरस कैसे गुजारे ?


कहा ....तेरे शौक की खातिर काँटों का वेश पहनती रही..


उसने पूछा ...काँटों के जख्म किस तरह से झेले?


कहा... दिल के खून में शगुन के सालू रंगती रही..


उसने कहा और क्या करती रही?


कहा -कुछ नही तेरे शौक की सुराही से दुखों की शराब पीती रही


उसने पूछा .इस उम्र का क्या किया


कहा कुछ नही तेरे नाम पर कुर्बान कर दी .[यह एक अमृता का साक्षात्कार है जो एक नज्म की सूरत में है ..]


अमृता ने एक जगह लिखा है कि वह इतिहास पढ़ती नही .इतिहास रचती है ..और यह भी अमृता जी का कहना है वह एक अनसुलगाई सिगरेट हैं ..जिसे साहिर के प्यार ने सुलगाया और इमरोज़ के प्यार ने इसको सुलगाये रखा ..कभी बुझने नही दिया ..अमृता का साहिर से मिलन कविता और गीत का मिलना था तो अमृता का इमरोज़ से मिलना शब्दों और रंगों का सुंदर संगम ....हसरत के धागे जोड़ कर वह एक ओढ़नी बुनती रहीं और विरह की हिचकी में भी शहनाई को सुनती रहीं ..


  प्रेम में डूबी हर स्त्री अमृता होती है या फिर होना चाहती है. पर सबके हिस्से कोई इमरोज नहीं होता, शायद इसलिए भी कि इमरोज होना आसान नहीं. ... किसी ऐसी स्त्री से से प्रेम करना और उस प्रेम में बंधकर जिन्दगी गुजार देना, जिसके लिए यह पता हो कि वह आपकी नहीं है।


जन्मदिन मुबारक इमरोज़


इस लिंक पर सुने इमरोज़ की कविताएं






Thursday, December 29, 2022

दुनिया के सात अजूबे दिल्ली में

 सात अजूबे


यह दिल्ली है,बस इश्क मोहब्बत प्यार .... सर्दी में दिल्ली की कुछ जगह बहुत ही सकून और गर्माहट से भर देती है। दिल्ली के पार्क और नई बनी यह कुछ जगह बढ़िया है देखने लायक ।


 #WasteToWonder एक ऐसी ही जगह है । यह निजामुद्दीन मेट्रो स्टेशन के पास है। यहां पुराने स्क्रैप से दुनिया के सात अजूबे बना रखें हैं। यह जगह inderprasthapark के बिल्कुल करीब है। और बहुत अच्छे से मेंटेन है। (near Hazrat Nizamuddin Metro Station, Block A, Ganga Vihar, Sarai Kale Khan, New Delhi, Delhi 110013)


  इसमें जाने का टाइम सुबह 11 से शाम 11 बजे तक है। टिकट सीनियर सिटीजन 65 से ऊपर की फ्री एंट्री है। 13 से 64 उम्र तक फिफ्टी रूपीज और बच्चों की 25 rs है। रात को साउंड एंड लाइट शो भी है। और यह स्क्रैप से बने सात अजूबे खूब सुंदर रोशनी से भर जाते हैं। अभी ठंड के कारण हमने रात वाले नजारे देखे नहीं, पर वाकई यह बहुत सुंदर दिखेंगे।


खाने की कोई वस्तु अंदर नहीं ले  जा सकते, किंतु अंदर बहुत सारे फूड स्टॉल है। जहां आप वेज नॉन वेज सब ले सकते हैं। रेट वाजिब है । कुछ महंगे कुछ ठीक ठाक।


   अंदर फूल ,पौधे और झरना भी है जिसकी कल कल पानी की आवाज़ मन मोह लेती है ,मेडिटेशन सा माहौल बना देती है। हर जगह सफाई और सुंदर फूलों से सजा हुआ है।  दिल्ली की सर्दी में इस सुंदर जगह में घूम आइए जब भी मौका लगे।



Sunday, December 25, 2022

हैप्पी क्रिसमिस

 

 हैप्पी क्रिसमिस


 क्रिसमस का त्योहार आते ही बच्चो की खुशी का ठिकाना नही रहता . सांता क्लाज  आयेंगे ढेर से तोहफे लायेंगे , यही उम्मीद लिए सारी दुनिया के बच्चे इनका इंतज़ार करते हैं । शायद ही दुनिया का कोई बच्चा ऐसा होगा जिसे इनका इंतज़ार न होगा।

   

 दुनिया भर का प्यार समेटे अपनी झोली में यह आते हैं और बच्चो को इंतज़ार होता है अपने तोहफों का जो वो चिठ्ठी [पाती] लिख के अपनी मांग उनको लिख के भेजते हैं . क्या आप जानते हैं कि " सांता क्लाज" को हर साल कितनी पाती मिलती है? आपको यकीन नही होगा लेकिन यह सच है कि हर साल उन्हें ६० लाख से भी ज्यादा पाती मिलती है और सांता उनका जवाब देते हैं .


 सयुंक्त राष्ट्रीय की  यूनीवर्सल   पोस्ट यूनियन के अनुसार "सांता क्लाज़ को ढेरों नन्हें मुन्ने बच्चों की  पाती मिलती हैं "सांता कितने लोकप्रिय हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि कम से कम २० देशों के डाक विभाग सांता के नाम से आने वाली चिट्ठियों  को अलग करने और फ़िर उनका जवाब देने के लिए अलग से कर्मचारी भरती करते हैं .....कई पाती पर तो सिर्फ़ इतना ही लिखा होता है "सांता क्लाज़ नॉर्थ पोल .."इन चिट्ठियों का  दिसम्बर में तो अम्बार लग जाता है।  कनाडा  डाक विभाग २६ भाषा में इनका जवाब देता है जबकि जर्मनी  की "डयुश    पोस्ट  " १६ भाषा में  इन का जवाब देती है कुछ देशो में तो ई-मेल से भी जवाब दिए जाते हैं पर सांता रहते कहाँ है यह  अभी साफ साफ नही पता चल पाया है :) पर कनाडा और फ्रांस के डाक कर्मी सबसे ज्यादा व्यस्त  रहते हैं क्यूंकि इन दोनों देशों  में १० लाख से भी ज्यादा नन्हें मुन्ने चिट्ठी लिखते हैं।


सर्दियों में मनाया जाने वाला यह त्योहार लगभग सभी देशों में मनाया जाता है लेकिन सांता को कई नामों से जाना जाता है कहीं फादर क्रिसमस ,तो कहीं सेंट निकोलस ,रूस में इन्हे "डेड मोराज़" के नाम से जाना जाता है


1)_यह तो हम सभी जानते हैं कि क्रिसमस पर सबको उपहार देने की परम्परा है लोग तरह तरह के उपहार देते हैं ..पर एक उपहार अब तक का सबसे व्यक्तिगत उपहार माना जाता है...वह था १९६९ की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अरबपति अमेरिकी व्यवसायी रास  पैरेट ने वियतनाम में अमेरिकी युद्धबंदियों के लिए विमान सेवा से २८ टन दवाइयां और उपहार भिजवाये थे |यह अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत  उपहार माना जाता है |


2)नेशनल क्रिसमस   ट्री एसोसिएशन के अनुसार अमेरिका में हर साल ३७.१ मिलियन क्रिसमस ट्री खरीदे जाते हैं |अमेरिका का राष्ट्रीय क्रिसमिस वृक्ष कैलोफोर्निया के किंग कैनन नैशनल पार्क में हैं | ३०० फीट ऊँचे इस सिकाओ वृक्ष को यह दर्जा १९२५ में दिया गया |


3) पूरी दुनिया में    क्रिसमस २५ दिसम्बर को मनाया जाता है पर सिर्फ़ यूक्रेन में यह ७ जनवरी को मनाया जाता है इसकी वजह यह है कि यहाँ पर रोमन कैथोलिक गेग्रोरियन कैलेंडर के साथ ही आर्थोडाक्स जुलियन कैलेंडर भी समान रूप से प्रचलित है


यूक्रेन   का क्रिसमस कुछ और कारणों से भी बहुत ख़ास है ..यहाँ क्रिसमस ट्री पर नकली मकडी और उसका जाल सजाया जाता है इस से यह माना जाता है कि घर में गुड़ लक आता है | यहाँ क्रिसमस की रात घरों में दावत की जबरदस्त तैयारी होती है और घर का सबसे छोटा बच्चा इवनिंग स्टार को देखने के बाद पार्टी शुरू करने का संकेत देता है


4)ग्रीस में क्रिसमस ट्री को सजाने और उपहार देने की परम्परा नहीं है | क्रिसमस की सुबह स्थानीय पादरी गांव के तालाब  में एक छोटा सा क्रास इस विश्वास के साथ फेंकता है  कि वह अपने साथ बुरी आत्माओं को भी डुबो देगा | इस के बाद पादरी गांव  के घर घर जा कर पवित्र जल फेंकते हैं ताकि घर से बुरी आत्माएं निकल जाए | इस बुरी आत्माओं को भगाने के प्रयास में ही वहां के लोग पुराना जूता या नमक जलाते हैं |


5)नार्वे में क्रिसमस पर रात्री भोज और उपहार को खोलने के बाद घर के झाडू को छुपा दिया जाता है |इस के पीछे यह मान्यता है कि हर रात बुरी आत्माएं  बाहर निकलती है और वह झाडू को चुरा कर उस पर सैर करती हैं |


6)अमेरिका में बच्चे क्रिसमस की रात सांता क्लाज से उपहार लेने के लिए जुराबे टांग  देते हैं   तो नीदरलैंड में बच्चे नवम्बर से ही अपने जुटे इस विश्वास के साथ टांग देते हैं घर के बाहर की सांता क्लाज उन्हें उपहार दे जायेंगे |


इस तरह क्रिसमस के रंग हर देश में खूब नए तरीके से मनाये जाते हैं ..किसी भी तरह मनाया जाए पर    यह बच्चो को तो बहुत ही प्यारा त्यौहार लगता है क्यों कि बहुत सारे उपहार जो मिलते हैं ..और सब तरफ शान्ति रहे सब को सदबुद्धि    मिले इसी दुआ के साथ आप सबको 

#happychristmas


Wednesday, December 14, 2022

होता है कभी ऐसे भी ...

 होता है कुछ ऐसा भी ......

कवि निराला जी के बारे में एक घटना पढ़ रही थी कि ,वह एक दिन लीडर प्रेस से रोयल्टी के पैसे ले कर लौट रहे थे | उसी राह में महादेवी जी का घर भी पड़ता था |उन्होंने सोचा की चलो मिलते चलते हैं उनसे .|ठण्ड के दिन थे अभी कुछ दूर ही गए होंगे कि सड़क के किनारे एक बुढिया उन्हें दिखायी दी जो ठण्ड से कांप रही थी और याचक भाव से उनकी तरफ़ देख रही थी | उस पर दया आ गई उन्होंने उसको न सिर्फ़ अपनी रोयल्टी के मिले पैसे दे दिए बलिक अपना कोट भी उतार कर दे दिया ..., और महदेवी के घर चल दिए किंतु चार दिन बाद वह यही भूल गए कि कोट क्या हुआ | उस को ढूढते हुए वह महादेवी जी के घर पहुँच गए ,जहाँ जा कर उन्हें याद आया कि वह कोट तो उन्होंने दान कर दिया था |


पढ़ कर लगा कि इस तरह जो डूब कर लिखते हैं या प्रतिभाशाली लोग होते हैं ,वह इस तरह से चीजो को भूल क्यों जाते हैं ? क्या किसी सनक के अंतर्गत यह ऐसा करते हैं ? या इस कद्र डूबे हुए होते हैं अपने विचारों में कि आस पास का कुछ ध्यान ही नही रहता इन को ।विद्वान मन शास्त्री का यह कहना है कि जब व्यक्ति की अपनी सारी मानसिक चेतना एक ही जगह पर केंद्रित होती है वह उस सोच को तो जिस में डूबे होते हैं कामयाब कर लेते हैं पर अपने आस पास की सामान्य कामो में जीवन को अस्तव्यस्त कर लेते हैं जो की दूसरों की नज़र में किसी सुयोग्य व्यक्ति में होना चाहिए |


इसके उदाहरण जब मैंने देखे तो बहुत रोचक नतीजे सामने आए .,.जैसे की वाल्टर स्काट यूरोप के एक प्रसिद्ध कवि हुए हैं ,वह अक्सर अपनी ही लिखी कविताओं को महाकवि बायरन की मान लेते थे और बहुत ही प्यार से भावना से उनको सुनाते थे |उन्हें अपनी भूल का तब पता चलता था ,जब वह किताब में उनके नाम से प्रकशित हुई दिखायी जाती थी |


इसी तरह दार्शनिक कांट अपने ही विचारों में इस तरह से गुम हो जाते थे कि , सामने बैठे अपने मित्रों से और परिचितों से उनका नाम पूछना पड़ता था और जब वह अपने विचारों की लहर से बाहर आते तो उन्हें अपनी भूल का पता चलता और तब वह माफ़ी मांगते |


फ्रांस के साहित्यकार ड्यूमा ने बहुत लिखा है पर उनकी सनक बहुत अजीब थी वह उपन्यास हरे कागज पर ,कविताएं पीले कागज पर ,और नाटक लाल कागज पर लिखते थे | उन्हें नीली स्याही से चिढ थी अत जब भी लिखते किसी दूसरी स्याही से लिखते थे |


कवि शैली को विश्वयुद्ध की योजनायें बनाने और उनको लागू करने वालों से बहुत चिढ थी | वह लोगो को समझाने के लिए लंबे लंबे पत्र लिखते |पर उन्हें डाक में नही डालते, बलिक बोतल में बंद कर के टेम्स नदी में बहा देते और सोचते की जिन लोगो को उन्होंने यह लिखा है उन तक यह पहुँच जायेगा | इस तरह उन्होंने कई पत्र लिखे थे |


जेम्स बेकर एक जर्मन कवि थे वह ठण्ड के दिनों में खिड़की खोल कर लिखते थे कि , इस से उनके दिमाग की खिड़की भी खुली रहेगी और वह अच्छा लिख पायेंगे |


चार्ल्स डिकन्स को लिखते समय मुंह चलाने की और चबाने की आदत थी | पूछने पर कि आप यह अजीब अजीब मुहं क्यों बनाते लिखते वक्त ..,तो उसका जवाब था कि यह अचानक से हो जाता है वह जान बूझ कर ऐसा नही करते हैं |


बर्नाड शा को एक ही अक्षर से कविताएं लिखने की सनक थी |उन्होंने अनेकों कविताएं जो एल अक्षर से शुरू होती है उस से लिखी थी ..,पूछने पर वह बताते कि यह उनका शौक है |


तो आप सब भी प्रतिभशाली हैं ,खूब अच्छे अच्छे लेख कविताएं लिखते हैं .| सोचिये- सोचिये आप किसी आजीबो गरीब सनक के तो शिकार नही :) कुछ तो होगा न जो सब में अजीब होता है .. | जब मिल जुल कर हम एक दूसरे के अनुभव, कविता, लेख पढ़ते हैं तो यह क्यूँ नही ।:) वैसे मेरी सनक है बस जब दिल में आ गया तो लिखना ही है ....और जब दिल नहीं है तो नहीं लिखना ......चाहे कितना भी जरुरी क्यों नहीं हो ...मतलब मूड स्विंग्स :)जल्दी जल्दी लिखे आप सब में क्या अजीब बात है मुझे इन्तजार रहेगा आप सब की सनक को जानने


का ॥:)#रंजू भाटिया

Monday, December 12, 2022

मुस्कान

 


कोई भी" दर्द "

मारता है 'तिल तिल 

फैलता है ,होले से 

और विदा होने से पहले 

वसूलता है ....

अपने रहने "का हर दाम 

कभी लफ़्ज़ों में ,

कभी कहानियों में

कभी किस्सों में 

और कभी "नम आँखों की बारिश में "

हर दाम चुकाने के बाद ही देता है "मुस्कान" किश्तों में धीरे धीरे !

#रंजूभाटिया