Wednesday, May 27, 2020

Zindagi in 2020 ( कैसे बचें इस महामारी से )

कोरोनावायरस महामारी से सुरक्षित रहने के सरल तरीके
 
साल 2020 शुरू हुआ तो किसी ने सोचा नहीं था कि यह साल इस तरह से पूरी दुनिया पर आफत बन कर लोगों को एक डर के साये में धकेल देगा । यह साल पूरी दुनिया के लिए" कोरोना साल" बन गया है । कोरोना महामारी ,जिसका अभी तक कोई इलाज़ नहीं है। वही धीरे धीरे पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है।
   चीन से शुरू हुई यह बीमारी जो बताया जा रहा चमगादड़ के सेवन से शुरू हुई ।और फिर एक इंसान से दूसरे इंसान तक फैलती चली गयी । यदि शुरू में ही इस बीमारी की गम्भीरता को समझ लिया जाता तो इतना दुनिया को नुकसान नहीं होता। पर पहले चीन के वुहान शहर जहां से यह महामारी शुरू हुई ,उन्होंने ही समझने में देर कर दी । जब तक यह समझ आती तब तक यह वहाँ तो इंसान की जान का काफी नुकसान कर ही चुकी थी । उस के बाद यह बाकी दुनिया को अपने चपेट में लेने लगी । अब तक कभी न देखे गए विश्व के इतिहास में यह वक़्त सबसे बड़ा लॉकडाउन  साबित हो रहा है ।
    पूरे विश्व की नेशनल ,इंटरनेशनल फ्लाइट कैंसिल कर दी गयी हैं । ताकि पूरी दुनिया के लोग सुरक्षित रह सकें । मानव इतिहास में पहली बार एक साथ ,एक ही तरह की ज़िंदगी पूरी दुनिया का एक ही चक्र चल रहा है । सब अपने अपने घरों में कैद है । से
ल्फ आसिलोएशन ,"सेल्फ अलगाव व्यवस्था ,"सब देश की सरकारों ने एक साथ कर दी है ।
    आइए पहले समझते हैं कि किस तरह से यह बीमारी फैलती है। यह बीमारी सर्दी खांसी और बुखार से शुरू होती है ,और फिर हमारे सांस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने लगती है । फेफड़े जो हमें सांस ले के जीवन दान देते हैं वह तेजी से इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं और वही सबसे अधिक खतरे की घन्टी है। फेफड़ों में तेजी से रेशा जमा होने लगता है और यह सांस लेने में दिक्कत करने लगता है।  फिर सांस के लिए वेंटीलेटर का सहारा जरूरी ही हो जाता है।
     इस बीमारी से बचाव के तरीक़े में जो किया जा सकता है वह है सेल्फ ,सम्पूर्ण "लॉकडाउन ", जो हर देश मे अब तक लागू हो चुका है । इसके प्रमुख लक्षणों में तेज सूखी खांसी ,बुखार और फिर सांस लेने की तकलीफ होने लगती है। यह लक्षण मुख्यता 14 दिन में एक इंसान में दिखाई देते हैं । और जब कोई व्यक्ति इस से संक्रमित होता है तो ,दूसरे व्यक्ति में यह छींक ,या खांसी से दूसरे व्यक्ति को दे देता है ।  इसलिए इस वक़्त समाजिक अलगाव यानी सोशल डिस्टेंस रखना बहुत जरूरी है । तभी हम इस वायरस की संक्रमण को रोक सकते हैं ।
   यह वायरस अलग अलग सतह पर अलग टाइम तक जीवित रहता है। इसलिए इस से बचने के लिए घर मे लायी गयी वस्तुओं का भी सेनिटाइज़ करना भी जरूरी है ।
   अब जानते हैं इस महामारी से बचने के वो सरल उपाय क्या है ,जिन्हें हम इस वक़्त अपना कर बच सकते हैं ।
 नम्बर एक सबसे पहले यह कि अपने अपने घरों में रहे । सरकार जो इस वक़्त आदेश दे रही है इसका सख्ती से पालन करें। यह वायरस ,घर मे बुजुर्ग सदस्यों को आसानी से चपेट में ले लेता है । रोज़ देखने वाली खबरों में हम ,इटली,स्पेन , ब्रिटेन ,और अमेरिका का हाल देख रहे हैं । वहां लॉक डाउन को बहुत अधिक गम्भीरता से शुरू में नहीं लिया गया ।जिस से वहां के हालात बहुत डरावने बन चुके हैं । यह वायरस इमन्युटी कम वाले व्यक्तियों पर आसानी से हमला करता है और साठ साल से ऊपर वालों में यह इमन्युटी कम होती है । इसलिए घर में ही रहे और अपने घर मे रहने वाले बुजुर्ग और बच्चों का ध्यान रखें ।
   घर में रहते हुए इस वायरस से बचने के लिए सफाई का ध्यान रखना वहुत जरूरी है । घर के दरवाजे के हेंडिल ,कॉल बेल साफ ,साबुन के पानी से करते रहें । घर में फिनायल के पानी से फर्श साफ करना वहुत जरूरी है । और उसके बाद अपने हाथों को 20 सेकेंड तक धोना बहुत जरूरी है। हाथ हर वक़्त डिटोल से धोएं या साधरण साबुन से पर बिना हाथों को धोएं न खाना बनाये न खाएं ।
    वैसे तो घर से बाहर न ही जाएं तो बेहतर है पर यदि जरूरी जाना ही है तो मास्क लगाएं ,यह मास्क बाजारी भी हो सकते हैं और यदि नहीं मिल रहे है तो घर में बने मास्क को लगाए बिना न निकलें । हाथ मे हो सके तो ग्लव्स जरूर पहनें , ताकि जो समान आप ले कर आ रहे है उस मे कोई वायरस या सक्रमण है तो बचा जा सके । इसके साथ ही जो सबसे जरूरी बात है कि अपने चेहरे ,आंख , नाक मुहं को हाथ मत लगाएं। घर आ कर सबसे पहले ग्लव्स कूड़ेदान में फेंके और साबुन से हाथ साफ करें । यदि घरेलू मास्क है तो वह धो कर दुबारा इस्तेमाल किया जा सकता है परंतु सर्जिकल मास्क का बार बार उपयोग न करें । यह आपको बीमार कर सकता है ।
   घर जो भी समान लाये जैसे सब्ज़ी,दूध के पैकेट इनको पहले चलते पानी मे धोए और कुछ घण्टे यूँ ही रहने दे फिर इस्तेमाल करें । दूध के पैकेट को धो कर खोल कर उबाल सकते हैं , पर सब्ज़ी को आप नमक हल्दी के पानी मे रख कर फिर सूखा कर ही फ्रिज में रखे ।
    इस महामारी से बचने के लिए इमन्युटी का स्ट्रांग होना बहुत जरूरी है । इस के लिए पौष्टिक घर का बना ही खाना खाएं और गर्म पानी का सेवन करें । हमारे देश मे हल्दी ,अदरक लौंग,काली मिर्च सदियों से सर्दी भगाने के लिए इस्तेमाल होती आ रहीं है इनको लेने की आदत डालें । ठंडे पानी ,ठंडी चीजों और बासी खाने से बचे । कोई ऐसी वस्तु इस वक़्त न खाएं जो गले मे खराश या बुखार का कारण बने ।
    यह कुछ छोटे पर महत्वपुर्ण उपाय हम खुद से करके इस वक़्त खुद को जब तक बचा सकते हैं बचाये । जब तक इस महामारी की कोई दवा या वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक इस वायरस से सावधान रहना जरूरी है । इन्हें अपना कर अपना ध्यान रखें और अपने घर के बुजर्गों और छोटे बच्चों का ध्यान रखें।

 
 
   

Tuesday, February 25, 2020

ताना बाना ( डॉ उषा किरण ) पुस्तक समीक्षा

ताना बाना ( काव्यसंग्रह )

सुन लो             

जब तक कोई

आवाज देता है

क्यूँ कि...

सदाएं  एक वक्त के बाद

खामोश हो जाती हैं

और ख़ामोशी ....

आवाज नहीं देती!!

   डॉ उषा किरण


कितनी सच्ची पंक्तियां है यह। हम वक़्त रहते अपने ही दुनिया मे रहते हैं बाद में पुकारने वाली आवाज़ों को सुनने की कसक रह जाती है । शब्दों का यह "ताना बाना" ,ज़िन्दगी को आगे चलाता रहता है । यही सुंदर सा शब्दों का" ताना बाना "जब मेरे हाथ मे आया तो घर आ कर सबसे पहले मैने इसमें बने रेखाचित्र देखे ,जो बहुत ही अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे , कुछ रचनाएं भी सरसरी तौर पर पढ़ी ,फिर दुबई जाने की तैयारी में इसको सहज कर रख दिया ।
     यह सुंदर सा "काव्यसंग्रह "मुझे "उषा किरण जी" से इस बार के पुस्तक मेले में भेंटस्वरूप मिली । उषा जी 'से भी मैं पहली बार वहीं मिली ,इस से पहले फेसबुक पर उनका लिखा पढ़ा था और उनके लेखन से बहुत प्रभावित भी थी । क्योंकि उनके लेखन में बहुत सहजता और अपनापन सा है जो सीधे दिल मे उतर जाता है ।
     पहले ही कविता "परिचय " में वह उस बच्ची की बात लिख रही हैं जो कहीं मेरे अंदर भी मचलती रहती है ,
नन्हे इंद्रधनुष रचती
नए ख्वाब बुनती
जाने कहाँ कहाँ ले जाती है
उषा जी ,के इस चित्रात्मक काव्य संग्रह में बेहद खूबसूरत ज़िन्दगी से जुड़ी रचनाएं हैं ।जो स्त्री मन की बात को अपने पूरे भावों के साथ कहती हैं । औरत का मन अपने ही संसार मे विचरण करता है ,जिसमे उसकी वो सभी  भावनाएं हैं जो दिन रात के चक्र में चलते हुए भी उसके शब्दों में बहती रहती है और यहां इन संग्रह में तो शब्दों के साथ रेखांकित चित्र भी है जो उसके साथ लिखी कविता को एक  सम्पूर्ण अर्थ दे देते हैं जिसमे पढ़ने वाला डूब जाता है।
डॉ उषा जी के इस संग्रह को पढ़ते हुए मैंने खुद ही इन तरह की भावनाओं में पाया , जिसमे कुछ रचनाएं प्रकृति से जुड़ी कर मानव ह्रदय की बात बखूबी लिख डाली है ,जैसे सब्र , कविता में
थका मांदा सूरज
दिन ढले
टुकड़े टुकड़े हो
लहरों में डूब गया जब
सब्र को पीते पीते
सागर के होंठ
और भी नीले हो गए

पढ़ते ही एक अजब से एहसास से दिल भर जाता है। ऐसी ही उनकी नमक का सागर ,बड़ा सा चाँद, एक टुकड़ा आसमान, अहम ,आदि बहुत पसंद आई । इन रचनाओं में जो साथ मे रेखाचित्र बने हुए है वह इन कविताओं को और भी अर्थपूर्ण बना देते हैं।
   किसी भी माँ का सम्पूर्ण संसार उनकी बेटियां बेटे होते हैं , इस संग्रह में उनकी बेटियों पर लिखी रचनाएं मुझे अपने दिल के बहुत करीब लगी
बेटियां होती है कितनी प्यारी
कुछ कच्ची
कुछ पक्की
कुछ तीखी
कुछ मीठी
वाकई बेटियां ऐसी ही तो होती है ,एक और उनकी कविता मुनाफा तो सीधे दिल मे उतर गई ,जहां बेटी को ब्याहने के बाद मुनाफे में एक माँ बेटा पा लेती है। जो रचनाएं आपके भी जीवन को दर्शाएं वह वैसे ही अपनी सी लगती है । लिखने वाला मन और पढ़ने वाला मन  कभी कभी शायद एक ही हालात में होते हैं । कल और आज शीर्षक से इस संग्रह की एक और रचना मेरे होंठो पर बरबस मुस्कान ले आयी जिसमे हर बेटी छुटपन में माँ की तरह खुद को संवारती सजाती है ,कभी माँ के सैंडिल में ,कभी उसकी साड़ी में , और इस रचना की आखिरी पँक्तियाँ तो कमाल की लगी सच्ची बिल्कुल
आज तुम्हारी सैंडिल
मेरी सैंडिल से बड़ी है
और .....
तुम्हारे इंद्रधनुष भी
मेरे इंद्रधनुष से
बहुत बड़े हैं !
इस तरह कभी बेटी रही माँ जब खुद माँ बनती है तो मन के किसी कोने में छिपी आँचल में मुहं दबा धीमे धीमे हंसती है  ( माँ कविता )
बहुत सहजता से उनके लिखे इस संग्रह में रोज़मर्रा की होने वाली बातें , शरीरिक दर्द जैसे रूट कैनाल में बरसों से पाले दर्दों से मुक्ति का रास्ता सिखला देती है ।
इस संग्रह की हर रचना पढ़ने पर कई नए अर्थ देती है । मुझे तो हर रचना जैसे अपने मन की बात कहती हुई लगी । पढ़ते हुए कभी मुस्कराई ,कभी आंखे नम हुई । सभी रचनाओं को यहां लिखना सम्भव नहीं पर जिस तरह एक चावल के दाने से हम उनको देख लेते है वैसे ही उनकी यह कुछ चयनित पँक्तियाँ बताने के लिए बहुत है कि यह संग्रह कितना अदभुत है और इसको पढ़े बिना नहीं रहा जा सकता है ।
"ताना बाना "डॉ उषा जी का यह संग्रह  इसलिए भी संजोने लायक है ,क्योंकि इसमें  बने रेखाचित्रों से भी पढ़ने वाले को बहुत जुड़ाव महसूस होगा  ।
  डॉ उषा जी से मिलना भी बहुत सुखद अनुभव रहा । जितनी वो खुद सरल और प्यारी है उनका लिखा यह संग्रह भी उतना ही बेहतरीन है । अभी एक ग्रुप में जुड़ कर उनकी आवाज़ में गाने सुने ,वह गाती भी बहुत सुंदर  हैं । ऐसी प्रतिभाशाली ,बहुमुखी प्रतिभा व्यक्तित्व के लिखे इस संग्रह को जरूर पढ़ें ।
धन्यवाद उषा जी इस शानदार काव्यसंग्रह के लिए और आपको बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं

ताना बाना
डॉ उषा किरण
शिवना प्रकाशन
मूल्य 450 rs



Monday, December 02, 2019

माँ नारी का सबसे सुंदर रूप ( भाग 3)

यदि आप माँ के साथ हैं तो उनका दिल ना दुखाएं और यदि माँ से भौतिक रूप से दूर हैं तो अपने दिन का थोडा सा वक़्त  माँ को समर्पित कर दे और उस वक़्त में फिर से बच्चे बन कर देखिये.....माँ के नाजुक हाथों का स्पर्श स्वमेव अपने ऊपर आशीर्वाद के रूप में पाएंगे !!!

ढल चुकी हो तुम एक तस्वीर में माँ
पर दिल के आज भी उतनी ही करीब हो
जब भी झाँक के देखा है आंखो में तुम्हारी
एक मीठा सा एहसास बन कर आज भी
तुम जैसे मेरी गलती को सुधार देती हो
संवार देती हो आज भी मेरे पथ को
और आज भी इन झाकंती आंखों से
जैसे दिल में एक हूक सी उठ जाती है
आज भी तेरे प्यार की रौशनी
मेरे जीने का एक सहारा बन जाती है !

!बच्चे को छाया एवं सुरक्षा महसूस होती रहे और अभाव महसूस ना हों इसके लिए माँ क्या क्या प्रयत्न करती है, शायद ही कोई पिता यह महसूस कर पाया होगा !वह सबसे मीठा शब्द है संसार का तभी वह देवताओं का सा स्थान पाती है ,संसार के सब रिश्तो को आप एक बार बोल कर देखे ,भाई बहन ,पति पत्नी ,आदि सब में पहले पुरुष का नाम आयेगा पर एक यही पावन रिश्ता है जिसमे माँ का नाम पहले लिए जाता है
माँ जो है ......
संसार का सबसे मीठा शब्द
इस दुनिया को रचने वाले की
सबसे अनोखी और
आद्वितीय कृति

है यह प्यार का
गहरा सागर
जो हर लेता है
हर पीड़ा को
अपनी ही शीतलता से

इंसान तो क्या
स्वयंम विधाता
भी इसके मोह पाश से
बच  पाये है
तभी तो इसकी
ममता की छांव में
सिमटने को
तरह तरह के रुप धर कर
यहाँ जन्म लेते आए हैं ॥

*****

माँ ..
दीवाली के रोशन दीयों की तरह
मैंने तुम्हारी हर याद को
अपने ह्रदय के हर कोने में
संजों रखा है

आज भी सुरक्षित है
मेरे पास तुम्हारा लिखा
वह हर लफ्ज़
जो खतों के रूप में
कभी तुमने मुझे भेजा था

आशीर्वाद के
यह अनमोल मोती
आज भी मेरे जीवन के
दुर्गम पथ को
राह दिखाते हैं
आज भी रोशनी से यह
जगमगाते आखर और
नसीहत देती
तुम्हारी वह उक्तियाँ
मेरे पथ प्रदर्शक बन जाते हैं
और तुम्हारे साथ -साथ
चलने का
एक मीठा सा एहसास
मुझ में भर देते हैं ..

Saturday, November 30, 2019

माँ ,नारी का सबसे सुंदर रूप ( भाग 2)

कहीं पढ़ा था कि ‘‘जब तुम बोल भी नहीं पाते थे तो मैं तुम्हारी हर बात को समझ लेती थी और अब जब तुम बोल लेते हो तो कहते हो कि माँ तुम कुछ समझती ही नहीं।’माँ साथ नहीं पर वह तब भी हर पल साथ महसूस होती है ,फिर भी एक स्नेह्हिल स्पर्श की जब जब जरूरत महसूस होती है तो यह शिकायत अपनी बात यूँ कह जाती है 

तुम तो कहती थी माँ कि..
रह नही सकती एक पल भी
लाडली मैं बिन तुम्हारे
लगता नही दिल मेरा
मुझे एक पल भी बिना निहारे
जाने कैसे जी पाऊँगी
जब तू अपने पिया के घर चली जायेगी
तेरी पाजेब की यह रुनझुन मुझे
बहुत याद आएगी .....


पर आज लगता है कि
तुम भी झूठी थी
इस दुनिया की तरह
नही तो एक पल को सोचती
यूं हमसे मुहं मोड़ जाते वक्त
 तोड़ती मोह के हर बन्धन को
और जान लेती दिल की तड़प
पर क्या सच में ..
उस दूर गगन में जा कर
बसने वाले तारे कहलाते हैं
और वहाँ जगमगाने की खातिर
यूं सबको अकेला तन्हा छोड़ जाते हैं


Monday, November 11, 2019

नारी का सबसे सुंदर रूप " माँ" ( भाग 1 )

नारी के सब रूप अनूठे हैं ,पर माँ का रूप सबसे अदभुत है कोई भी स्त्री माँ बन कर  अपनी संतान से कितना प्यार कर सकती है बदले में कुछ नही चाहती,यही  नारी का सबसे प्यारा रूप  होता है बस वो सब कुछ उन पर अपना लुटा देती है और कभी यह नही सोचती की बदले में उसका यह उपकार बच्चे उसको कैसे देंगे ! नारी का रूप माँ के रूप में सबसे महान है इसी रूप में वो स्नेह , वात्सलय , ममता मॆं सब उँचाइयों को छू लेती है | उसके सभी दुख अपने बच्चे की एक मुस्कान देख के दूर हो जाते हैं! 

तभी हमारे हिंदू संस्कार में माँ को देवता की तरह पूजा जाता है माँ को ही शिशु का पहला गुरु माना जाता है सभी आदर्श रूप एक नारी के रूप में ही पाए जाते हैं जैसे विद्या के रूप में सरस्वती ,धन के रूप में लक्ष्मी, पराक्रम में दुर्गा ,सुन्दरता में रति और पवित्रता में गंगा ..वो उषा की बेला है, सुबह की धूप है ,किरण सी उजली है इस की आत्मा में प्रेम बसता है| और जब माँ नहीं रहती तो सब कुछ सुनसान हो जाता है 

माँ लफ्ज़ ज़िंदगी का वो अनमोल लफ़ज़ है ... जिसके बिना ज़िंदगी, ज़िंदगी नही कही जा सकती ...अपनी माँ के जाने पर मुझे यह सूनापन आज तक महसूस होता है और मेरे पास अब सिर्फ शब्द है उनके दिए स्नेह को समझने के लिए



मेरा बचपन थक के सो गया माँ तेरी लोरियों के बग़ैर
एक जीवन अधूरा सा रह गया माँ तेरी बातो के बग़ैर

तेरी आँखो में मैने देखे थे अपने लिए  सपने कई
वो सपना कही टूट के बिखर गया माँ तेरे बग़ैर..... 

माँ जन्म देने वाली हो या पालने वाली ,दोनो ही दिल के करीब होती हैं। जन्म देने वाली से पालने वाली माँ की अहमियत भी कम नहीं समझ सकते । अपने पर्सनल अनुभव से मैं यही कह सकती हूँ। 


माँ हर पल तुम साथ हो मेरे, मुझ को यह एहसास है
आज तू बहुत दूर है मुझसे, पर दिल के बहुत पास है।

तुम्हारी यादों की वह अमूल्य धरोहर 
आज भी मेरे पास है,
ज़िंदगी की हर जग को जीतने के लिए,
अपने सर पर आज भी मुझे महसूस होता तेरा हाथ है।

कैसे भूल सकती हूँ माँ मैं आपके हाथों का स्नेह,
जिन्होने मुंह में मेरे डाला था पहला निवाला,
लेकर मेरा हाथ अपने हाथों में,
दुनिया की राहों में मेरा पहला क़दम था जो डाला
जाने अनजाने माफ़ किया था मेरी हर ग़लती को,
हर शरारत को हँस के भुलाया था,
दुनिया हो जाए चाहे कितनी पराई,
पर तुमने मुझे कभी पराया नही किया था,
दिल जब भी भटका जीवन के सेहरा में,
माँ की प्रीत ने एक नयी रहा जीवन को दिखाई।

ज़िंदगी जब भी उदास हो कर तन्हा हो आई,
माँ तेरे आँचल के घने छांव की बहुत याद आई।

आज नही हो तुम जिस्म से साथ मेरे,
पर अपनी बातो से , अपनी अमूल्य यादो से
तुम हर पल आज भी मेरे साथ हो..........
क्योंकि माँ कभी ख़त्म नही होती .........
तुम तो आज भी हर पल मेरे ही पास हो.........

शेष अगले भाग में ....