Tuesday, July 28, 2009

देख के सावन झूमे है मन ..



यह एक पुरानी कविता है ,जिसको पढने वाले पाठक "वसंत जी " ने इस चित्र के साथ सुन्दर रूप में बदल दिया है ,और आशीष जी ने इसको पोस्ट करने का तरीका बताया :)...बहुत ही अच्छा लगा यह चित्र इस कविता के साथ मुझे तो ..आपको पसंद आया या नहीं ...जरुर बताये .शुक्रिया

35 comments:

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह क्या बात है एक नया प्रयोग कर दिया। सच मन झूमने लगा है। और उस पर ये प्यारी सी रचना सोने पे सुहागा है।
भीगे मन और तन दोनों
ताल तलैया डुबो जाए
देख के सब तरफ हरियाली
मयूर सा दिल नाचा जाए।

बहुत ही खूबसूरत।

‘नज़र’ said...

अत्यन्त सुन्दर
-----------
1. विज्ञान । HASH OUT SCIENCE
2. चाँद, बादल और शाम
3. तकनीक दृष्टा

awaz do humko said...

भीगा मन भीगी मुंडेर
मजा आ गया पढ कर

अनिल कान्त : said...

हमें कविता भी बहुत पसंद आई और फोटो भी

ओम आर्य said...

bahut hi umda abhiwyakti ........ek sundar manbhawan rachana ......bahut hi sundar .....aise hi likhate rahe ....badhaaee

डॉ. मनोज मिश्र said...

कविता और तरीका दोनों मनभावन.

नीरज गोस्वामी said...

एक तो कविता लाजवाब और ऊपर से कमाल के चित्र पर ...याने सोने में सुहागा...धन्य हुए हम...
नीरज

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

फोटो और रचना दोनो बढ़िया है .

डॉ .अनुराग said...

दिलचस्प !!!काबिले तारीफ प्रयोग है..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

झूम-झूम कर बरस रहा बादल मनभावन है।
रचना पढ़कर, रसना बोली आया सावन है।।
सुन्दर रचना, बढ़िया चित्र।
बधाई।

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बहुत सुंदर.

रामराम.

M VERMA said...

मौसमी रचना के लिये बधाई

दिगम्बर नासवा said...

saavan के bheegte mousam को नया जीवन दे दिया इस रचना ने............... shabdon को नया arth दिया है इस prayog ने............ लाजवाब, बहुत खूबसूरत

Arvind Mishra said...

सुन्दर रचनात्मक प्रयोग !

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

ranju ji..
bahut achha likha hai....
keep inspiring n writing....
all the very best..
have sent u a request on facebook...

P.N. Subramanian said...

सुन्दर वादियों में अति सुन्दर रचना. एक समस्या है. हमारा कंप्यूटर आगाह कर रहा है कीकहीं कोई मालवेर है जो हमारे सिस्टम को नुक्सान पहुंचा सकता है.

suresh sharma (cartoonist) said...

एक तो आपकी कविता अतिसुंदर ऊपर से बेहतरीन प्राकृतिक दृश्य जैसे सोने पे सुहागा !

संगीता पुरी said...

सावन तो बरस नहीं रहा .. नकली सावन ही बनाना होगा .. बहुत सुंदर प्रयोग किया है .. कविता तो बहुत अच्‍छी लगी .. चित्र से पोस्‍ट और बढिया बन गया है !!

अल्पना वर्मा said...

वाह रंजना जी!..सब से पहले-: यह खिले फूलों का जो हेडर लगाया है..वही मन को मोह रहा है..उस के लिए ढेर सारा धन्यवाद..
[पहले सूखे पत्ते और गहरे रंग वाला हेडर मुझे पसंद बहुत नहीं था मगर हिम्मत नहीं थी की आप से यह बात कहूँ.]
इन्हें देख कर ऐसा लग रहा है जैसे ये फूल मुस्करा कर 'हेल्लो ' कह रहे हों.
--और आज.. आप की इस सामायिक मौसमी कविता की प्रस्तुति भी बहुत अनूठी लगी..मौसम के साथ गुनगुनाती हुई यह कविता और चित्र मन को भा गए...

सैयद | Syed said...

खूबसूरत... तस्वीर भी और रचना भी...

AlbelaKhatri.com said...

rang bhi
roop bhi
chhanv bhi
dhoop bhi
____________kitne nazaare hain
ek kavita me kitne ishaare hain
waah
waah
waah
abhibhoot kar diya
___rachnaa nayi puraani kya hoti hai ?

samajhdaar log not ki vailue dekhte hain printing date nahin.....ha ha ha ha

Pankaj Upadhyay said...

वाह एक तो आपकी कविता ऊपर से ये नया स्टाइल... काफ़ी अच्छा है..

अल्पना वर्मा said...

Ranjana ji,
kal ek comment likha tha..abhi dikh nahin raha???

dobara likh rahi hun...

aap ke blog ka naya header ..bahut hi sundar hai...


Kavita bahut achchee lagi...aur is ki prastuti bahut hi manmohak hai...
Basant ji ne aap ki kavita ki chitrmay lajawab prastuti ki hai.

vandana said...

kavita aur chitra dono hi manmohak hain.

रश्मि प्रभा... said...

sundar prayog,sundar kavita....

Nirmla Kapila said...

मौसम ने चुनरी ओढी तो कविता और तस्वीर और भी खिल उठी बहुत सुन्दर बधाई

रंजन said...

chitra or kavita dono bahut sundar he..badhai..

हिमांशु । Himanshu said...

अत्युत्तम कविता - सुन्दर चित्र । आभार ।

Pankaj Mishra said...

बहुत ही खूबसूरत!!


pankaj

Science Bloggers Association said...

ये तो लाजमी है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

Nice thoughts..cool presentation.. happy blogging :)

महामंत्री - तस्लीम said...

Ye chitramay prastuti man ko bhaa gayi.

"लोकेन्द्र" said...

कविता के साथ जब प्रकृति की छाव हो तो वो हमेशा ख़ूबसूरत लगाती है..........

अभिषेक ओझा said...

कविता, चित्र, प्रस्तुति सब सावन की तरह मनभावन !

मुकेश कुमार तिवारी said...

रंजना जी,

बहुत सुन्दर शब्दों को एक भावों के साथ पिरो कर एक नया अंदाज दिया है, रचना भले ही पहले लिखी गई हो किंतु प्रस्तुति ने मजा ला दिया।

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी