Monday, May 05, 2008

कुछ यूं ही चंद लफ्ज़

राज़

यादों से भरे बादल को
वक्त की हवा उडाये जाती है
पीड़ा आंखो से बस यूं ही
बरस बरस जाती है
छा जाती है नर्म फूलों
सोई उदासी भी
सन्नाटे में धड़कन भीएक राज़ बता जाती है !!


आस की किरण

आस की किरण
बोली मुझसे कि
बसने दे
अपने दिल में
सजने दे आशियाना
मिटा दूँगी तमस
तेरे मन का
और भर दूँगी दरार
जिसमें से छन कर
मैं तेरे दिल तक पहुँच रही हूँ...

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