Thursday, April 12, 2007

मोहब्बत का दिया


जला तो दीया है किसी ने दिल में मोहब्बत का दिया
तलाशता है दिल अब बस उन्ही को यही कही

बेते हैं हम उस राहा पर उनके इंतज़ार में
जहाँ से तेरी राहगुज़र भी अब नही

हर पल बस देखा है तुझे अपने तस्वुर में
तुझे एक पल भी दिल भुला हो ऐसा कभी हुआ ही नही

तुझे सोचा है इतना महसूस किया है रूह से
कि बस अब तेरी जुदाई का भी हम पर कोई असर नही
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