Wednesday, August 13, 2008

दिल की रागिनी


हूँ तेरे साथ मैं आज ,
कुछ बहके हुए एहसासों से
छिपा ले मुझे बाँहों में सनम कि,
वक़्त कटे ना अब बातो से
तेरे ही सांसो से जुड़ी ,
मैं साथ तेरे हर पल चली हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ .......


दिल धड़क रहा है मेरा
आज कुछ नये अंदाज़ से
सीने में है कुछ मचले हुए जज़्बात से
नज़रो में एक मीठी सी कसक ले के जगी हूँ
तेरे नयनों में बन सपना ,मैं ही तो खिली हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज में तेरे दिल से जुड़ी हूँ .......


रात है कुछ आज सुरमई महकी हुई ,
बहकी है यह मदमस्त हवा भी
कर ले तू भी नादानियां आज
दिल की बहकी फ़िज़ाओ से...
आज तेरे साथ मैं सब हदों को ..
पार करने की नीयत से खड़ी हूँ
बाँध ले आज अपने प्यार की डोर से सनम,
मैं इस पल के लिए दुनिया से लड़ी हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ ....

१३-०२ ०५

25 comments:

रंजन गोरखपुरी said...

बेहद रूमानी रचना.... बहुत दिनो बाद कुछ ऎसा पढने को मिला!!

राज भाटिय़ा said...

तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ ....
रंजना जी ,आप की कविता पढ पढ कर लगता हे मे भी कवि बन जाउगा,बहुत सुन्दर कविता कही हे आप ने धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बाँध ले आज अपने प्यार की डोर से सनम,
मैं इस पल के लिए दुनिया से लड़ी हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ ....


--बहुत सुन्दर! वाह!

कुश said...

कुछ पंक्तिया तो वाकई दिल को भा गयी.. आप जितना सोचती है ना उस से कई ज़्यादा अच्छा लिखती है..

Satish Saxena said...

रोमांटिक एवं सुंदर लिखा है !

seema gupta said...

दिल धड़क रहा है मेरा
आज कुछ नये अंदाज़ से
सीने में है कुछ मचले हुए जज़्बात से
नज़रो में एक मीठी सी कसक ले के जगी हूँ
"beautiful lines, so loving poetry romantic see lgee, enjoyed reading it"

Regards

Mohinder56 said...

रंजना जी,

पुरानी डायरी बाकई काम की लगती है... बढिया रुमानी कविता के लिये बधाई

Ila's world, in and out said...

रूमानियत की इन्तेहा को सजीव करती रचना.बहुत सुन्दर.पढ कर दिल में कुछ कुछ होने लगा है.वैसे भी बारिश कम गज़ब नहीं ढा रही है.

रश्मि प्रभा... said...

दिल धड़क रहा है मेरा
आज कुछ नये अंदाज़ से
सीने में है कुछ मचले हुए जज़्बात से
नज़रो में एक मीठी सी कसक ले के जगी हूँ
तेरे नयनों में बन सपना ,मैं ही तो खिली हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज में तेरे दिल से जुड़ी हूँ .......
kashish hi kashish hai

शोभा said...

रात है कुछ आज सुरमई महकी हुई ,
बहकी है यह मदमस्त हवा भी
कर ले तू भी नादानियां आज
दिल की बहकी फ़िज़ाओ से...
आज तेरे साथ मैं सब हदों को ..
पार करने की नीयत से खड़ी हूँ
बाँध ले आज अपने प्यार की डोर से सनम,
मैं इस पल के लिए दुनिया से लड़ी हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ ....बहुत अच्छा लिखा है। बधाई

ilesh said...

रात है कुछ आज सुरमई महकी हुई ,
बहकी है यह मदमस्त हवा भी
कर ले तू भी नादानियां आज
दिल की बहकी फ़िज़ाओ से...
आज तेरे साथ मैं सब हदों को ..
पार करने की नीयत से खड़ी हूँ
बाँध ले आज अपने प्यार की डोर से सनम,
मैं इस पल के लिए दुनिया से लड़ी हूँ
तेरे ही दिल की रागिनी बन के
आज मैं तेरे दिल से जुड़ी हूँ ....



Bahot khub dil ko chhu gai ye rachna....

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

रंजना जी,
रुमानी और प्यारी कविता लिखी है आपने जी !
- लावण्या

kavita malaiya said...

रंजनाजी...आपकी ये कविता सचमुच पुरानी लग रही है क्योंकि इसमें छोटी उम्र्र का कच्चापन और कोरापन साफ़ झलक रहा है.हम आपके जैसे रचनाकार तोह नहीं किन्तु एक बार हमारे ब्लॉग में जाकर थोडा मार्गदर्शन करें?http://suniyesunaiye.blogspot.com

वेद प्रकाश सिंह said...

excellent mam.......ise padhkar mera dil dhadakne laga hai,bahut hi sajeev-chitran kiya hai aapne...

Mumukshh Ki Rachanain said...

रंजू जी,

शानदार रूमानी गीत प्रस्तुति के लिए धन्यवाद.
निम्न लाइन बेहद पसंद आयी .......

नज़रो में एक मीठी सी कसक ले के जगी हूँ
तेरे नयनों में बन सपना ,मैं ही तो खिली हूं
बधाई स्वीकार करें.

चन्द्र मोहन गुप्त

Smart Indian said...

बहुत सुन्दर कविता.

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं!

वँदे मातरम!

योगेन्द्र मौदगिल said...

शुभकामनाएं पूरे देश और दुनिया को
उनको भी इनको भी आपको भी दोस्तों

स्वतन्त्रता दिवस मुबारक हो

is ragini ke liye badhai..wah

डॉ .अनुराग said...

वाकई सुबह सुबह अच्छी नीयत है .....जस्ट जोकिंग....रूमानी कविता.......

श्रद्धा जैन said...

बहुत सुन्दर कविता

सुनीता शानू said...

आप तो वैसे ही लव गुरू के नाम से विख्यात है दी आपने लिये तो आसान है इतनी सुन्दर कविता लिखना...:)
आपको व आपके पूरे परिवार को स्वतंत्रता दिवस की अनेक शुभ-कामनाएं...
जय-हिन्द!

Vinay said...

बहुत ख़ूबसूरत ख़्याल, जैसे प्यार का जाम छलक रहा हो!

Asha Joglekar said...

बेहद रूमानी रचना।

बालकिशन said...

अति सुंदर.
बहुत उम्दा..
अद्भुत लिखा आपने.
पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा.

Jugal Gaur said...

आपकी ये रचना भी बहुत ही अच्छी है....
पढ़वाने का बहुत बहुत शुक्रिया......

Abhishek Ojha said...

लगता है अब आपसे टिप्स लेने पड़ेंगे, शायद मेरे जैसे का भी कुछ भला हो जाय !