Tuesday, August 12, 2008

आठ- आठ -आठ का असर हम पर असर आखिर कर ही गया

आठ- आठ -आठ का असर हम पर असर आखिर कर ही गया | पिछले बीते कुछ दिन यह बता गए कि जो हम सोचते हैं वह नही होता अक्सर जो तय होता है वह ही होता है | आठ -आठ -आठ हर टीवी चेनल पर सुनते सुनते लगा की पता नही क्या कहर बरपा होने वाला है इस दिन | शाम के ५ बजे पतिदेव घर पधारे और चाय पीते पीते मैंने कहा कि कुछ नही हुआ इस आठ आठ का असर यूँ ही हल्ला मचा देते हैं मिडिया वाले भी |

मुस्कराते हुए यह बोले ,''टीवी भी तुम्ही देखती रहती हो ..चलो मैं यह अलमारी हिल रही है इसको ठीक कर देता हूँ ...और कुछ देर बाद रसोई के पास से छन्नं से कई कप टूटने की आवाज़ आई .भाग कर देखा तो यह अपनी कटी ऊँगली को वाशबेसिन में धो रहे हैं और सब तरफ़ खून ही खून ..बाबा रे !!यह क्या कर दिया ...कुछ नही ऊपर लगे शीशे की शेल्फ को पकड़ कर ऊपर से कील उठा रहा था लगता है वह टूट कर ऊँगली काट गया है | ओहोहो आप भी देख कर काम नही कर सकते क्या ..मैं इतना सारा बहता खून देख कर घबरा गई थी

हल्ला मत मचाओ चलो डाक्टर के पास लगता है ज्यादा कट गई है .कैसे क्यों ? पूछने का अभी समय नही था ..भागी साथ वाले डाक्टर के पास ले कर इन्हे ..उसने कहा लगता है कि नस कट गई है कोई ...मूलचंद ,या सफ़दर ज़ंग ले कर जाओ ,मैं फर्स्ट एड कर देता हूँ ..|

वहां से ले कर इन्हे सफ़दरज़ंग भागी |क्यूंकि वहां एक दो बार इमरजेंसी में जाना हो चुका था कुछ वहां कि जानकरी थी कि कैसे जल्दी से सब होगा | वहां इमर्जेंसी में डाक्टर ने जल्दी ही देख कर कहा कि कमरा नम्बर १०५ में ले कर जाए इन्हे वही टिटनेस का इंजेक्शन भी लग जायेगा और स्टिचिस भी | पर वहां जा कर जैसे ही डाक्टर ने वह बंधी पट्टी खोली तो खून का फव्वारा मेरे अब तक लगातार आंसूं की तरह बह निकला ॥| "'

"अरे अरे"'! यह तो बहुत ज्यादा कट गया है आप इनको ओ टी में ले जाओ वहीँ से वह प्लास्टिक सर्जरी में रेफर कर देंगे आपको | मेरा सब्र का बाँध तो कब से साथ छोड़ चुका था पर यह मुझे यूँ ले कर ओ टी की तरफ बढे जैसे हाथ इनका नही मेरा कटा है | लगातार बहता खून देख कर मेरी घबराहट बढती जा रही थी और यह उतने ही सब्र से डाक्टर को सब बता रहे थे | आधे घंटे बाद डाक्टर ने ओ टी से बाहर आ कर कहा अब इन्हे पल्स्टिक सर्जरी वाली विंग में ले जाओ यहाँ मैंने जो करना था कर दिया है ..नस कट के अलग हो गई थी उसका खून बहना अब इतना खतरनाक नहीं है फ़िर भी आप जल्दी से जल्दी वहां पहुँचो ..|

यहाँ तक सब तुंरत फुरंत हुआ था पर प्लास्टिक सर्जरी में जा कर एहसास हुआ कि यह सही गवर्मेंट हॉस्पिटल है जहाँ इलाज डाक्टर की मर्ज़ी से ही होगा :) हम वहां ६.३० पर पहुँच गए थे और अब ८ बजने को थे डाक्टर का कोई अता पता नही | जो दो नर्स ड्यूटी पर थी वह इतने बुरे बुरे मुहं बना कर कह रही थी सब्र करो अभी आ जायेंगे डाक्टर शायद राउंड पर होंगे ..| दर्द यह सह रहे थे और तकलीफ मुझे हो रही थी ऐसे में सब्र कहाँ |

८.१५ पर डाक्टर साहब पधारे और देख कर कहा कि एक्स रे करवाओ पहले फ़िर आगे का काम होगा जब एक्स रे की रिपोर्ट आ जाए नर्स को बता देना वह मुझे बुला लेगी बहुत रूखे ढंग से कह कर चले गए |

अब इन्हे ले कर एक्स रे करवाने भागी | वहां एक्स रे वाले ने कहा एक घंटे बाद आ कर रिपोर्ट लेना |
कहाँ फंस गए हम यह सोच रही थी मैं और यही सोच कर इनसे कहा की चलो कहीं और चलते हैं यहाँ तो देर लग रही है बहुत ॥
नहीं अब यही करवा लेते हैं फ़िर आगे का देख्नेगे राजीव ने कहा और मैं इस बन्दे की सहनशीलता देख रही थी कि इतना खून बहता देख कर भी उफ़ नहीं | एक घंटे के बाद एक्स रे मिला नर्स को बताया | उसने कहा कि अब तो डाक्टर साहब डिनर पर चले गएँ हैं अब जब आएंगे तब आयेंगे | मेरा पारा अब तक हाई पिच पर जा चुका था कहा आप उनके सेल पर फ़ोन करे यहाँ खून बहना बंद नही हो रहा है और वहां उनको डिनर की पड़ी है | यह मुझे रोक रहे थे कि यही होता है गवर्मेंट हॉस्पिटल में कुछ मत कहो यहाँ | नर्स ने दो तीन बार फ़ोन कर दिया उनके सेल पर |९.३० बजे डाक्टर जी पधारे
और नर्स जो अब तक हमें कह रही थी कि डाक्टर साहब कि मर्ज़ी जब आए मैंने तो आपके कहने पर फ़ोन कर दिया है | वह डाक्टर को देखते ही पासा पलट गई कि इन लोगों ने हल्ला मचा रखा था , अब क्या डाक्टर खाना भी न खाए ..उसके कहते ही मैंने उसकी तरफ़ गुस्से से जैसे ही देख कर डाक्टर साहब को कुछ कहने कि कोशिश की ही थी कि
वह गुस्से में जो गरजे कि आप लोग ख़ुद को समझते क्या है ? क्या इमर्जेंसी है क्या नही ...यह मुझे आपसे बेहतर पता है ..
तो लगा कि क्या यह डाक्टर बनते समय जो शपथ ग्रहण की जाती है वह भूल गए हैं वो याद दिलाऊं इन्हे या इस वक्त हमें इनकी जरूरत है चुप हो जाऊं ?

राजीव ने कहा सॉरी डाक्टर असल में यह घबरा गई थी सो जल्दी करने को कहा .!

''आप चुप हो जाइये ""
'।इतनी जल्दबाजी है तो किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में जाते यहाँ क्यों आए ? "

जी हाँ यही गलती हो गई हमसे मैंने गुस्से में कहा | राजीव ने जोर से मुझे आँखे दिखायी और कहा प्लीज़ डाक्टर साहब आप गुस्सा न हों | पर उस डाक्टर का गुसा शांत होने के मुझे कोई असार नही नज़र आ रहे थे | एक्स रे एक तरफ फेंक कर गुस्से से बोले साइन करिए यहाँ पर कि आप ही इस सर्जरी की जिम्मेवार है और शायद यह ऊँगली अब काम नही कर पाएगी ।मैं कोशिश करूँगा ॥ और जहाँ पहले गई थी वहां से लिखवा के लाये कि यह पुलिस केस नही है | मैं अभी सकते में खड़ी थी कि यह सुन कर और हाय ओ रब्बा अब यह कहाँ से पुलिस केस बन गया |

जाओ जाओ लिखवा लाओ राजीव ने फॉर्म दे कर मुझे जाने को कहा | उसके बाद राम राम कर के प्लास्टिक सर्जरी शुरू हुई जो तीन घंटे चली | यही लगता रहा बाहर बैठे हुए कि अन्दर वह गुस्सा शांत रखे और सब ठीक हो जाए | तीन घंटे बाद बाहर आ कर दवाई बतायी और सोमवार आने को बोला ,अब उनका गुस्सा शांत था |

रात के ३ बज चुके थे आठ -आठ -आठ अपना असर हम पर पूरी तरह से दिखा गई थी |

पर कल यानी कि सोमवार को जब ड्रेसिंग करवाने गई तो वहां इतना दर्द बिखरा हुआ था चारों तरफ़ कि देख कर दिल रो पड़ा और तब लगा कि हमारे लिए उस वक्त अपनी तकलीफ बहुत बड़ी थी ,पर उस डाक्टर के लिए नही |क्यूंकि वह सिर्फ़ एक ऊँगली कटी हुई नही देखता है वह तो यहाँ उन मरीजों को भी देखता है जो न जाने अपने शरीर का कौन कौन सा अंग खो कर उसके पास आते हैं और वह एक जीने की आस दे कर उन्हें ठीक करने की कोशिश में लगा होता है | यह सब देख कर उस डाक्टर के प्रति गुस्सा शांत हो गया और लगा कि दर्द बहुत है दुनिया में....और अपने उस छोटे से दर्द से जो बहुत बड़े हैं |फ़िर भी एक उम्मीद पर यहाँ आते हैं कि ठीक हो जायेंगे |और यही डाक्टर रूपी मसीहा उनके दर्द को कम कर देगा |
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