Saturday, July 26, 2008

बरस तू किसी सावन की बादल की तरह

महावीर ब्लॉग पर मुशायरे की एक झलक



बरस आज तू किसी सावन की बादल की तरह
मेरी प्यासे दिल को यूँ तरसता क्यूँ है

है आज सितारों में भी कोई बहकी हुई बात
वरना आज चाँद इतना इतराता क्यूँ है

लग रही है आज धरती भी सजी हुई सेज सी
तू मुझे अपनी नज़रो से पिला के बहकाता क्यूँ है

दिल का धडकना भी जैसे हैं आज कोई जादूगिरी
हर धड़कन में तेरा ही नाम आता क्यूँ है

बसी है मेरे तन मन में सहरा की प्यास सी कोई
यह दिल्लगी करके मुझे तडफाता क्यूँ है
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