Thursday, July 10, 2008

सपनो की रहस्यमयी दुनिया .....

बातें सपनो की .....सपनो की अपनी ही एक रहस्यमयी दुनिया है ...सपने शब्द भी अलग अलग अर्थ देते हैं कुछ सपने हमारे आने वाले कल से जुड़े होते हैं और कुछ हम आगे बढ़ने के लिए देखते हैं पर कई बार यही सपने किसी इंसान को मौत की कगार तक ले जाए या इतने अवसाद से भर दे की जीना मुश्किल हो जाए तो वह सोचने पर मजबूर कर देते हैं .. .कल मनविंदर [जो की मेरठ में एक पत्रकार हैं ] की यह मेल मेरे पास आई जिस में उन्होंने सपने से प्रभावित एक लड़की की कहानी जो अब इस दुनिया में नही है को कवर किया और वह इस अनोखे अनुभव को मुझ से शेयर करना चाहती थी पर जब से इसको पढ़ा तब से सोच में हुईं कि क्या सच में सपनो का कोई अस्तित्व होता है ? या हालत हमें कुछ संकेत देते हैं ? और इन हालत में क्या इंसान ख़ुद को इतना असहाय पाता है ...बहुत सी बातें कई बात अनबुझी सी पहली बन कर रह जाती हैं ...पर इनका हल और अर्थ हर कोई अलग अलग ढंग से निकालता है ..क्यूंकि मैं भी अक्सर कुछ संकेत अपने सपनों से पाती रहती हूँ ..जैसे अपनी माँ के जाने का सपना मैं बहुत छोटी उम्र से देखती रही पर कभी किसी को बताया नही की कोई क्या सोचेगा पर माँ के जाने के बाद वह सपना नही देखा मैंने कभी भी ..फ़िर जब भी अनहोनी होनी होती वह मेरे सपने में दिख जाता है जैसे बड़ी बेटी का गिरना और उसका मेरा उसी हालत में ले कर हॉस्पिटल भागना जैसे मैंने अपने सपने में देखा था और भी कई मेरी जिंदगी से जुड़े सपने हैं जो अकसर मुझे किसी अनहोनी का संकेत देते रहे हैं ...अभी हम बात करते हैं इस लड़की किरण की ..

रंजना जी ,
इस अनोखे अनुभव को आपके पास भेज रही हूं।

आफिस में सुबह की मीटिंग में मुझे असाइनमेंट मिला ´जिस लड़की ने सूसाइड किया है, उसके घर का माहौल कवर करना है।`
और मैं निकल पड़ी टीपी नगर की नई बस्ती, ज्वाला नगर की ओर। पूछते पूछते किरण , जिनसे सूसाइड किया था, का घर मिल गया। गेट के बाहर पुलिस की दो गािड़यां खड़ी थीं। मुझे ताज्जुब हुआ , किरण के घर का बाहरी गेट बंद था। तभी गेट खुला और अंदर से पुलिस निकली, उसके पीछे पीछे किरण की डेड बॉडी उठाये उसके पिता भी निकले। अचानक किरण का एक हाथ नीचे की ओर लहर गया, जिस पर लिखा था, मैं नौकरी नहीं मिलने के कारण आत्महत्या कर रही हूं। कुछ भी समझ नहीं आया कि इस दुखी परिवार से कैसे पूछूं, क्या जानूं, क्या कवर करूं । मन में आया कि उनका दुख कम करने के लिये कुछ कहूं लेकिन वो भी न कर सकी, माहौल की वजह से।
किरण की बॉडी ले कर पुलिस चली गई। घर में किरण की मां, उसकी दो बहनें और एक छोटा भाई रह गया। सभी लोग गमजदा थे। समझ नहीं पा रही थी कि मैं कहां से बात 'शुरू 'करूं, पांच मिनट यूं ही गुजर गये, मैंने होले से किरण की बहन प्रीति से पूछा, आखिर हुआ क्या, क्यों बीटेक जैसी डिग्री हासिल करने के बाद भी किरण को आत्महत्या करनी पड़ी।
प्रीति ने बताया, किरण बड़ी सेंसेटिव थी। कल रात को ही वह दिल्ली से लौटी थी, कंपनी देख कर आयी थी जिसने उसे कैंपस से सिलेक्ट किया था। उसने घर आ कर सभी को बताया कि वह दो कमरे में चलने वाली कंपनी में नौकरी नहीं करेगी लेकिन वह भीतर से आहत थी जैसे कोई बात उसे भीतर ही भीतर खाये जा रही हो। अनमने मन से किरण ने खाना खाया और अपने कमरे में चली गई और पीसी पर बैठ गई। आखिरी बार उसने जॉब साइट सर्फ की रात को पौने बारह बजे। यह बात कम्पयूटर की मेमोरी से पता चली।
सुबह जब घर के लोग उठे तो किरण रैलिंग से झूल कर आत्महत्या कर चुकी थी। उसे इस हालत में देख कर सभी रोने पीटने लगे।
मैने प्रीति से कुछ और टटोलने का प्रयास किया तो वह काफी चौकाने वाला था,
किरण दस दिन पहले छत पर गई तो उसका पैर जले हुए कागजों पर पड़ गया। उसी दिन से उसे बुरे बुरे सपने आने लगे। अकसर सपनों में उसे जलते हुए मुर्दे दिखायी देते जो उसे भी आग की ओर खीचने का प्रयास करते। इस का जिक्र उसने अपनी बुआ से किया। उसने दो दिन पहले ही सभी के सामने उसने यह भी कहा , अब सपनों वाले मुर्दे उसे नहीं छोड़ेंगे। अंदर से वह काफी अपसेट भी थी। बात बात पर चिढ़ जाती थी। बेहद डिप्रेशन महसूस कर रही थी।
डाक्टर कहते हैं कि सपनों से सच का कोई वास्ता नहीं होता है। सपने क्यों आते हैं, यह लंबी बहस का मुद्दा हो सकता है।
किरण का सपना था कि वह अच्छी नौकरी करके अपने परिवार के सपने पूरे करे लेकिन उसके सपनों पर कुछ और सपने हावी हो गये। बस कुछ अजीबो गरीब सपने उसे जग से छीन कर ले मनविंदर ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर के एडिटर को जब दी तब उनके सहयोगी ने भी कहा कि , मैडम! ये क्या लिख दिया आज, क्या आज की सदी में ऐसी बातें लिखना क्या उचित है। पर क्या सच था ...?? तो आप वह हिस्सा निकाल दो अगर नहीं उचित लग रहा है। मनविंदर ने कहा .....सुबह अखबार देखा तो पेज थ्री पर थी वह खबर, सपनों ने ले ली किरण की जान...


अब आप बताये कि क्या सपनो ने उसकी जान ली या उस वक्त उस पर बीत रहे हालात ने ....या कोई न कोई कारण बनता है मौत के सफर पर जाने का ...? क्या यह सच होता है ..? क्या सच में कोई संकेत कर जाता है इन बुरे सपनों से ..हम अकसर इन्हे नज़रंदाज़ क्यों कर देते हैं ? बहुत से सवाल है दिल में . ....पर अब यह मानती हूँ की कोई शक्ति हमारे अन्दर की ही हमे सूचना जरुर देती है पर शायद हम उस को पहचान नही पाते ..और लोगो को बताने से भी झिझक जाते हैं कि वह हमारे बारे में क्या सोचेंगे ....जैसे मैं किसी को कह नही पायी कभी भी ..
Post a Comment