Wednesday, July 09, 2008

लव ...तब और अब ....

""अरे कहाँ थी इतनी देर ""मैंने अपनी बेटी से पूछा तो वह बोली कि अपनी एक सहेली के साथ थी "'वह बहुत अपसेट थी क्यों क्या हुआ ?"' अरे माँ उसका ब्रेकअप हो गया ""अच्छा क्या वह उस से शादी करने वाली थी क्या ॥""मैंने पूछा
कम ऑन माँ हर बात शादी तक पहुंचे यह जरुरी नही है ..तो फ़िर कहे को अपसेट है वो ..उफ्फो माँ आप कुछ नही समझती यह आपकी अमृता इमरोज़ वाला प्यार अब नही रहा की हुआ सो हुआ अब इंस्टेंट लव होता है ..और नही निभता तो बस सब खत्म अगला तलाश करो ..यह आज कल की फास्ट लाइफ है ...सब बिजी हैं

हाय ओ रब्बा !!!कह कर मैंने उसकी तरफ़ शक से देखा
माँ मुझे ऐसे मत देखो ..मेरे पास टाइम नही है इन फालतू बातों के लिए
यह सुन कर मैंने बहुत बड़ी राहत की साँस ली और आज कल के बच्चो की प्यार की परिभाषा तलाशने लगी बाप रे क्या क्या नाम हैं आज कल इस के क्रश ,डेटिंग और कहाँ जा रहे हैं हम कितना आसान कर दिया है सब कुछ विज्ञान ने मोबाईल लव ,नेट लव ..
बहुत सारे लोग इस खोज में लगे हैं कि यह प्रेम नामक चीज क्या है और यह क्यूँ हो जाता है परन्तु इस नामुराद प्रेम के आगे वैज्ञानिक भी हार गए हैं पुराने समय से चले आ रहे इस खोज में यह पता चला है कि प्रेम का कोई नुस्खा जरुर है अब नई वैज्ञानिक खोज में कहा जाने लगा है कि यह ""डोपमाइन "' नमक रसायन से होता है जो पानी के बुलबुले सा फूलता है और फूट जाता है जबकि जन्मों से प्रेम के बंधन को मानने वाले कहते हैं यह तो आत्मा से जुडा प्रेम है जो कृष्ण ने राधा से किया था विवाह तो उन्होंने रुकमनी से किया था संसार भर में किसी भी प्रेम प्रसंग में राधा कृष्ण सी प्रेम उपमाये नही मिलती है दोनों का प्रेम इतना गहरा था कि पता ही नही चलता था कि राधा कौन और कृष्ण कौन ॥यही प्रेम तो सच्चे प्रेम का प्रतीक था अब यह प्रेम कहाँ हवा हो गया ॥अब आते हैं ६० ७० के दशक में तब भी प्रेम इशारों और खतों के जरिये जाहिर होता था वो भी अक्सर पड़ोस कि लड़की से जब दिखी तभी रेडियो पर आते रोमांटिक गाने प्यार किया तो डरना क्या ..मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर कहीं तुम नाराज़ मत होना आदि आदि गानों से दिल कि बात पहुंचाई जाती थी और ऐसे ऐसे शेर ख़त में लिखे जाते थे कि लिखते हैं ख़त खून से श्याई मत समझना ।मरते हैं तेरी याद में जिंदा न समझना ...:)क्या फड़कते हुए शेर कविता होती थी तब शीशी भरी गुलाब की पत्थर पर तोड़ दू ...सूरत तेरी न देखू तो जीना ही छोड़ दू ... क्या सोच थी तब लिखने वालों की :)


इस तरह के प्रेम में केवल आत्मा हो तो भी चलेगा इसी तरह के प्रेम से सारे साहित्य भरे पड़े हैं अक्सर कहा जाता है कि जब तक प्रेम न हो तो प्रेम पर लिखा ही नही जा सकता है और आज कल ....
आज के इंस्टेंट लव पर यानी २ मिनट लव पता नही क्या करते हैं यह आज कल के बच्चे एक दूसरे को देखा और लगे प्यार की दुहाई देने फट शादी फट तलाक ....यह पश्चिम में तो सुना था कि ८० वर्ष की उम्र में एल्जिबेथ ने १२ विवाह किया और १८ वां प्यार भी अब यह कौन से रसायन का कमाल है पता नही कालिदास ने अपने शंकुल्तम में राजा दुष्यंत द्वारा अपनी प्रेमिका को भूल जाने की बात कही है जरुर यह इसी कमबख्त रसायन डोपामाइन के कारण हुआ होगा किंतु इसकी खोज अब जा कर हुई है अब यह पता ही चल गया तो देवदास बन कर दारु पीने की जरुँरत क्या है इन दिनों प्रेम व्रेम करना वैसे भी बहुत महंगा है एक नॉरमल कमाने वाला इंसान की क्या खा के प्रेम करेगा अब तो मेगी की तरह फिल्मी प्यार है तभी मर्डर और जिस्म जैसी पिक्चर पसंद की जाने लगी हैं और वही आज कल के माहोल में देखेने में आ रहा है चलिए इनको अपनी शोध जारी रखने दे कि सा प्रेम सही है कौन सा ग़लत कौन सा शास्वत है और कौन सा मेगी मोबाईल और नेट प्रेम है

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