Monday, June 30, 2008

शायद आज भी ..[अल्पना ..रंजू ]

शायद आज भी तू दिल के आस पास है
हर पल बस तेरा ही ख्याल है ,अहसास है


नादान दिल है करता है क्या क्या ख्वाइशें
जानती हूँ जर्रे को आसमान की आस है
शायद आज भी ......
मृगतृष्णा सी बसी है मन में तृष्णा कोई
बुझती नही यह कैसी सहरा की प्यास है

शायद आज भी

आंखो में था मेरा कोई अनकहा सा बादल
दिल की ज़मीन का भीगा सा लिबास है

शायद आज भी ..
कैसे कैसे ख्वाब तू दे गया मुझे
न टूटने वाला यह भ्रम ख़ास है !!

शायद आज भी तू दिल के आस पास है
हर पल बस तेरा ही ख्याल है ,अहसास है


मेरी लिखी इस रचना को गाया है अल्पना वर्मा जी ..मुझे उनको आवाज़ में हमेशा ही एक कशिश सी लगी है ..उस से बढ कर लगा है उनका जनून जो गाने के लिए है ..यह सुने और बताये कैसा लिखा गया और कैसा गाया गया है ...ताकि अल्पना और मैं आगे के लिए सुधार कर सके .शुक्रिया :)
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