Monday, April 28, 2008

हमराह



कभी राह का हर निशान
हर पेड़ और हर पत्ता
खिलते फूलों की महक,
बहती मीठी मंद बयार
आसमान पर खिलता चाँद
और अनगिनत चमकते सितारे
मिल के हमने ...
एक साथ ही तो देखे थे...
तब से इन्ही अधखुली आंखों में
मेरी नींद तो क्वारी सो रही है
पर
जन्म दिया है ...
उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को
जो दिन ब दिन
पल पल कुछ तलाश करते
आज भी तुझे हमराह बनाने को
उसी मंजिल को दिखा रहे हैं !!
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