Monday, April 28, 2008

हमराह



कभी राह का हर निशान
हर पेड़ और हर पत्ता
खिलते फूलों की महक,
बहती मीठी मंद बयार
आसमान पर खिलता चाँद
और अनगिनत चमकते सितारे
मिल के हमने ...
एक साथ ही तो देखे थे...
तब से इन्ही अधखुली आंखों में
मेरी नींद तो क्वारी सो रही है
पर
जन्म दिया है ...
उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को
जो दिन ब दिन
पल पल कुछ तलाश करते
आज भी तुझे हमराह बनाने को
उसी मंजिल को दिखा रहे हैं !!

14 comments:

कुश said...

बहुत सुंदर रचना.. बधाई..

डाॅ रामजी गिरि said...

"मेरी नींद तो क्वारी सो रही है
पर
जन्म दिया है ...
उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को"

आपकी ये पंक्तियाँ सीधे रूह से संवाद स्थापित करती हैं, बहुत ही सुन्दर....

Mohinder56 said...

रंजना जी
एक गाना याद आ गया आप की कविता पढ कर
अश्कों में जो पाया था, वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है कि जमाने को गिला है
जो साज से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो साज पे गुजरी है वो किस दिल को पता है

आलोक साहिल said...

तब से इन्ही अधखुली आंखों में
मेरी नींद तो क्वारी सो रही है
और
जन्म दिया है ...
उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को
पंक्तियों में आपने गजब ढा दिया है,बेहतरीन,
आलोक सिंह "साहिल"

डॉ .अनुराग said...

दिल से लिखी बात कागज पर उतरी है .....सच ना ?

राजीव रंजन प्रसाद said...

उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को
जो दिन ब दिन
पल पल कुछ तलाश करते
आज भी तुझे हमराह बनाने को
उसी मंजिल को दिखा रहे हैं !!

बहुत खूब रंजना जी..

*** राजीव रंजन प्रसाद

अमिताभ मीत said...

वाह ! क्या बात है. बहुत बढ़िया.

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!!

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

बहुत नाज़ुक सा एह्सास लिखती रहीये यूँ ही
स्नेह्,
- लावण्या

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav said...

तुम्हारे गीत तुम्हारे हामराह है...

चलते रहों वर्तनी थामे..

रश्मि प्रभा... said...

बहुत ही अच्छी लगी है......
मन तक उतर गई.

सरस्वती प्रसाद said...

तुम जो लिखती हो,
उसे मैंने अक्सर महसूस किया है,
साझी सोच है.

Asha Joglekar said...

सुंदर !

Mukesh Garg said...

bahut hi aachi rachna