Friday, March 30, 2007

तुझ बिन ना होगा मेरा गुज़ारा



सजना यह कैसा है प्यार हमारा
ना दुनिया की परवाह है यह जाग से न्यारा

हर पल है बस एक ही आरज़ू दो दिलो की
की मिल जाए कही तो इस दिल को किनारा

कभी ना सोचा था होगा ऐसा
यूँ लूटा बेतेंगे हम चैन हमारा

देखे थे कभी जो स्तरागी सपने इस दिल ने
तेरी आँखो से, बोलो से वोह छलके रंग सारा

मिलता होगा सकूँ किसी को उस खुदा की इबादत से
मेरे होंठो पर जाप तेरा सीने में सुलगे ताप तुम्हारा

एक बार भर ले मुझे अपनी बाहों में सजना
तभी शायद मेरी बेचैन रूह को मिले सहारा

जब मिले तुझसे नयना तब जाना मेरे दिल ने
की सबसे अनमोल है यह प्यार का दिलकश नज़ारा

शायद तुझे कभी चाहा ना हो मेरी अपनी ज़िंदगी में
पर तेरे बिन अब ना होगा मेरे एक पल भी गुज़ारा
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