Saturday, February 24, 2007

निशानियाँ


जाते जाते माँग ली उसने सभी निशानियाँ अपनी
मौत देनी थी यूँ मुझे तो किश्तो में तो दी होती

थी ख़बर क्या एक दिन यह भी होगा
हमने तो अपनी साँसे तक उनके नाम थी कर दी

बदल गये वो भी हवाओ, की रुख़ की तरह
कुछ तो अपने जाने की ख़बर हमको दी होती

मिल जाती हमे पनाह उनकी बाहों में अगर
तो यह ज़िंदगी यूँ ना मुश्किल हुई होती

था वो बेबसी का आलम जब हम जुदा हुए
काश उस पल में यह दर्द की दास्तान ना हुई होती

माँगना था तो माँग लेते हमसे वो हमारी जान भी
पर यूँ अपने बीते पलो की निशानियाँ तो ना माँगी होती
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