Monday, February 19, 2007

दुआ देता है


मेरे कानो में चुपके से कौन सदा देता है
मेरे अंदर बुझी हुई राख को कौन हवा देता है

हर दर्द और हर ग़म को बसा रखा है हमने सीने में
यह दर्द ही है जो हर पल जीने का मज़ा देता है

बीत रही है मेरी उमर एक तन्हा से दर्द के साथ
उसकी यादो का मधुर उजाला इसमें कोई दीप सा जला देता है

जब भी कि हमने किसी से भल्लाई कि बात इस ज़माने में
वोह ही हमे सबके सामने गुनहगार ठहरा देता है

जब भी देखा किसी के दिल में झाँक कर हमने तो एक दर्द ही पाया
यह दर्द का रिश्ता भी कभी कभी दो दिलो को मिला देता है

मेरा दिल भी कितना मासूम और भोला है
यह ख़ुद को दर्द देने वाले को भी दुआ देता है !!
ranju
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