Friday, February 02, 2007

एक ख्वाब एक कहानी ...


मेरी आँखो में एक ख्वाब फिर से सज़ा दे
एक अंधेरा है मेरी ज़िंदगी की राहा, तू कोई आस का दीप जला दे

भटक रही हूँ मैं ज़िंदगी के वीरान सेहरा में
एक प्यास है दिल में कही ठहरी हुई ,तू आके वोह बुझा दे

एक भटकी हुई मुसाफ़िर हूँ मैं या हूँ कोई पगली पवन
आके मेरी राहो को तू अब तो मंज़िल से मिला दे..

कोई भूली हुई कहानी हूँ ,या एक बिसरा हुआ हूँ सपना
के तू अब मेरे ख्वाब को अब तो हक़ीकत बना दे.
ranju
Post a Comment