Friday, February 02, 2007

मेरी गज़ल के लफ़्ज़ो को गुनगुना के देखिए


नही है दूर कोई मंज़िल आपसे
ज़रा नज़र को उठा कर तो देखिए

रोने के लिए है सारी उमर यहाँ
एक लम्हा हँसी का गुनगुना के देखिए

आएँगे पलट के फिर से ज़माने मासूम इश्क़ के
एक बार बहारो को अपने पास बुला कर तो ज़रा देखिए

राहा कौन सी नही है मुश्किल यहाँ
बस होसला दिल का बढ़ा के देखिए

दिल लगता नही है यहाँ किसी के लगाने से कभी
कभी किसी के प्यार को नज़ारो में बसा के देखिए

जब हो कोई दिल की बात या ही समा उनके इंतज़ार का
मेरी गज़ल के लफ़्ज़ो को गुनगुना के देखिए !!
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