Thursday, February 01, 2007

अहसास


पेडो से जब पते गिरते है तो,
उसको:" पतझड़" कहते हैं
और जब नये फूल खिलते हैं तो,
उसको" वसंत कहते हैं
दूर मिलने का आभास लिए
जब धरती गगन मिलते हैं
तोह उसको "क्षितिज कहते हैं
पर
तेरा मेरा मिलना क्या है
इसे ना तो "वसंत,"
ना तो "पतझड़"
और ना "क्षितिज कहते हैं
यह तो सिर्फ़ एक अहसास है
अहसास
कुछ नही, एक पगडंडी है
तुमसे मुझे तक आती हुई,
मैं और तुम,
तुम और मैं
जिसके आगे शून्य है सब...................
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