Friday, January 26, 2007

एक गज़ल लिखने की कोशिश में.....


एक गज़ल लिखने की कोशिश में जो लफ्ज़ हमसे लिखा गया
वो उनका ही नाम था जो बार बार लिखा गया

माँगते रहे मेरे सूखे लब उनसे एक पनहा प्यार की
वो साया सा बन के मेरे पास से गुज़र गया

हमने चाहा की आज चुपके से चूम ले हम चाँद की पलको को
पर सुबह होते ही मेरा ख़वाब टूटे आईने सा टूट गया

रुके थे हम उनकी आँखो के समुंदर में डूबने के लिए
वो एक लहर सी बन के मेरे पास से गुज़र गया

ना जाने कितने ज़ख़्म खाए हमने उनकी मोहब्बत में
हर बार वो नये ज़ख़्म दे कर और दर्द दे के चला गया

अपनी हाथो की लक्रीरो में हमने ना पाया था नाम उनका
उनको पाने के लिए मेरा वजूद अपनी तक़दीर तक से लड़ गया


ranju
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