Monday, January 29, 2007

यादो के साए ******


कुछ यादो के झूरमूट से साए हैं
जो तेरी बातो से दिल में उतर आए हैं
इनको जगाना ना था तूने अपनी कड़वी बातो से
यह गुज़रे पल हमको अक्सर रुलाए हैं

जब भी हाथ बढ़ाया है इन्हे समेटने के लिए
मेरे दिल में अक्सर छाले से उभर आए हैं
कहा था तुमने की ज़िंदगी का सच बता रहा हूँ मैं
पर मेरे दिल को सिर्फ़ ख्वाबो के साए ही भाए हैं

अब जो जगा दिया तुमने अपनी बातो से इन को
तो मेरे दिल में कई सवाल से उभर आए हैं
क्यूं बुना अपने आस पास इन बेदर्द रिश्ते का जाल
जिसे लोग प्यार शब्द कह कर बुलाते आए हैं
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