तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके
शाम महके तेरे तस्वुर से
शाम के बाद फ़िर सहर महके
रात भर सोचता रहा तुझको
जहनों दिल मेरे रात भर महके
याद आए तो दिल मुरबर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके
वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे
वह जमीन महके वह शजर महके [जगजीत सिंह की गायी एक और खूबसूरत गजल ]