Thursday, April 27, 2017

यादो का ताजमहल

तेरी कुछ यादे हैं
ख़ुश्बू है और कुछ ख़ाली ख़त है
पास मेरे
जिन्हे मैं आज भी
 अपनी तन्हाई में पढ़ लिया करती हूँ

सज़ा है इस दिल में
कोई तेरी ही यादो का ताजमहल
आज भी उसके साए को याद करके तुझे नज़र भर के प्यार कर लेती हूँ !!

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (30-04-2017) को
"आस अभी ज़िंदा है" (चर्चा अंक-2625)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक