Saturday, July 23, 2016

सुनो ज़िन्दगी !!

सुनो ज़िन्दगी !!
तेरी आवाज़ तो ......
यूँ ही, कम पड़ती थी कानों में 
अब तेरे साए" भी दूर हो गए 
इनकी तलाश में 
बैठी हुई
एक बेनूर से
सपनों की किरचे
संभाले हुए ......
हूँ ,इस इंतजार में
अभी कोई पुकरेगा मुझे
और ले चलेगा
कायनात के पास .......
जहाँ गया है सूरज
समुंदर की लहरों पर हो कर सवार
"क्षितिज" से मिलने
और वहीँ शायद खिले हो
लफ्ज़, कुछ मेहरबानी के
जो गुदगुदा के दिल की धडकनों को
पूछेंगे मुझसे
कैसी हो बोलो ?
क्या पहले ही जैसी हो ?
‪#‎रंजूभाटिया‬
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