Wednesday, September 04, 2013

गुजरे लम्हात




लिखे तो होंगे लफ्ज़ उसने कोरे कागज़ पर
और नाम उसको ख़त का दिया होगा
बदला होगा कुछ ख्वाबों को हकीकत में
और नाम मोहब्बत रख दिया होगा
यूं मिटाया होगा हर फासले को उसने
हर राह से काँटों को चुना होगा
जिस तरफ़ फैली होगी प्यार की खुशबु
उस को अपनी मंजिल कहा होगा

चुरा के रखे लिए होंगे साथ  गुजरे लम्हात
दिल में बसी तस्वीर का सजदा किया होगा
जरुरी नही है मदिर मस्जिद में दुआ करना
जब अपने गीतों में उसने हाल दिल का कहा होगा

ranju bhatia dayari ke panno se ..............
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