Friday, July 26, 2013

"हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह"मुंबई यात्रा भाग ४

"हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह"मुंबई यात्रा लिखे जाने के अब अंतिम  पडाव  पर है  अब तक के लिखे का  मुंबई की बारिश की तरह पढने वालों का रुझान भी ऊपर नीचे ग्राफ में शो होता रहा …इस लिए शोर्ट फॉर्म अपनाते हुए इस में मुंबई की बारिश का जिक्र और मुंबई से लोनावाला रास्ते की खूबसूरती देखते ही बनती है इसको पूना मुंबई का मुख्य प्रवेश दरवाज़ा  भी कह सकते हैं  बरसात के मौसम में इसकी खूबसूरती अक कोई जवाब नहीं !!!और रास्ते  में  मिलने वाले पुलिस वाले अपनी जुगाड़ की जुगत में कई तरह के टैक्स  वसूलते हुए मिले का कोई तोड़ नहीं :) ! लोनावाला महाराष्‍ट्र का एक हिल स्‍टेशन है।रस्ते भर में मिलने वाले बरसाती झरनों और सुरंगों  मन मोह लिया ।और वहां पहुँच कर जो मौसम का नजारा दिखा  उसको शब्दों में ब्यान करना मुश्किल है …।बाद्लो पर   हम थे या बीच में कहीं गुम थे वो शब्द ब्यान  नहीं कर सकते हैं बारिश के ठन्डे मिजाज में बादलों की आवाजाही कमाल थी और उस पर  गर्म गर्म कई तरह के पकोड़े उफ़ लाजवाब थे :) हमेशा याद रहने वाले जगह में से एक है यह जगह ज़िन्दगी भर … अगले दिन एलिफेंटा केव्स देखने का प्रोग्राम  तेज धूप में स्टीमर पर ऊपर बैठने का मंजर भी कभी भूला नहीं  जा सकता है  एक घंटे का सफ़र राम राम करके पूरा हुआ …और वहां पहुंचते  ही तेज बारिश शुरू हो गयी स्टीमर से उतरते ही टॉय ट्रेन में बैठने के मोह से कोई बच नहीं पाया और छुक छुक करती उस ट्रेन में मस्ती करते हुए जाना कैसे भुला जा सकता है :) और  पर एक सौ  बीस सीढियां वो भी तेज बरसात में भी नहीं भुला जा सकता :) अरब सागर के टापू पर स्थित एलिफेंटा में कुल सात गुफाएं हैं जिनमे पांच हिन्दू और दो बौद्ध हैं। बड़ी ही खूबसूरती से   पत्थर पर  शिव की नौ मूर्तियाँ बनी हुई है  जिनमे शिव के अलग अलग तरह के रूप और मुद्राओं को दर्शाया गया है।ब्रह्मा विष्णु महेश की त्रिमूर्ति तो देखने लायक है । शिव पार्वती की शादी से ले कर चौपड़ खेलने की बात और  पंचपरमेश्वर और अर्धनारीश्वर रूप को वहां गाइड ने बहुत ही रोचक ढंग से ब्यान किया अच्छा रहा यह मुंबई का सफ़र खाने पीने की मस्ती से लेकर कार में और वहां रहने वाली अपनी कजन सिस्टर की बेटी की मदद से लगता है हमने मुम्बई की हर सड़क को देख लिया ।हर अंदाज़ में मुंबई बिंदास लगी बारिश है तो वो भी  बिंदास अभी तेज धूप है तो अभी तेज बारिश जैसे सब कुछ डूब जाएगा …।अपने अंदाज़ में बरसती  यह बारिश वाकई कमाल थी ।और मुंबई भी ……दिल्ली और मुम्बई के बारे में अंतर करने लगे तो वह बहुत मुनासिब नहीं होगा ..हर शहर हर शख्स की तरह खुद में बुराई अच्छाई लिए हुए है ......और दोनों में वही बुराई भी और अच्छाई भी ......पानी का समुन्दर मुंबई के पास है तो भीड़ का समुन्दर दोनों शहरो के पास ......दिल्ली में भी धीरे धीरे खुद में मस्त रहने की आदत पनपती जा रही है ....पर फिर भी अभी खत्म नहीं हुई ....और भी बहुत कुछ जिसे वहां जा कर खुद ही महसूस किया जा सकता है और समझा जा सकता है ....अभी इतना ही ..शिव कुमार बटालवी की दो पंक्तियाँ याद आरही है .......यादों की एक भीड़ मेरे साथ छोड़ कर,क्या जाने वो कहाँ मेरी तन्हाई ले गया|.सफ़र खत्म  हो जाते हैं वहां से आने के बाद पर उसकी यादे उसी सफ़र में डूबी रहती है और कहती है कभी अपने किसी लेख में या कभी अपनी किसी कविता के माध्यम से ….वहां के कुछ शब्द रास्ता पूछने पर ।इधर से कट मारो उधर से कट मारो …सो मिलते हैं इसी तरह कोई और शहर के बारे में कट मारते हुए :)और मुंबई की बारिश पर अपनी लिखी कुछ पंक्तियाँ याद आ रही है .............
देख के सावन झूमे है मन
दिल क्यूँ बहका लहका जाए
बादल की अठखेलियाँ
बारिश की बूदें
मिल के दिल में
 उत्पात मचाए

भीगे मन और तन दोनो
ताल-तलैया डुबो जाए
देख के सब तरफ हरियाली
मयूर सा दिल नाचा जाए
यात्रा समाप्त .....अगले किसी शहर की महक ले कर फिर से मुलाकात होगी आपसे ..शुक्रिया उन सभी दोस्तों का जो इस मुंबई लेखन यात्रा  के  सफ़र में हमसफर बन कर पढ़ते रहे ...:)
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