Wednesday, July 24, 2013

फुहारें कुछ यूँ ही

फुहारें कुछ यूँ ही

आसमान के तन पर
छिटके हुए बादल के टुकड़े
"उम्मीद" से हैं ....
और धरती पर
इन्तजार उसका
एक "शाही मेहमान "के
आगमन के इन्तजार सा है !!!

मुंबई जलमग्न है बारिश से और दिल्ली में इन्तजार है बरसने का ....और टीवी न्यूज़ है कि कल से नए शाही मेहमान(रॉयल बेबी ) के आने में पगलाई हुई है ..:)

भीगी मिटटी की गंध
थमी हुई  हवा
बरसती बूंदे
बोझिल साँसों
को कर देती हैं
और भी तन्हा
दिल में भरे गुबार को
आँखों से बरसने के लिए
किसी मौसम की भविष्यवाणी का
इन्तजार नहीं करना होता ...........

..सच है न ..? और कुछ फासले , कुछ फैसले किसी भविष्यवाणी के मोहताज नहीं होते ...रंजू भाटिया
 

13 comments:

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

प्रवीण पाण्डेय said...

रोचक और सुन्दर फुहारें..

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद खूबसूरत रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

दिगम्बर नासवा said...

गहरे एहसास में डूब के लिखे शब्द ...
दिल को छूते हाँ अंदर तक ...

parul chandra said...

loved it !

आशा जोगळेकर said...

खूबसूरत प्रस्तुति । भोगा हुआ यथार्थ ।

आशा जोगळेकर said...

खूबसूरत प्रस्तुति । भोगा हुआ यथार्थ ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आँखों से बरसने के लिए
किसी मौसम की भविष्यवाणी का
इन्तजार नहीं करना होता ..........

ये बारिश तो बारहमासी है ..... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आँखों से बरसने के लिए
किसी मौसम की भविष्यवाणी का
इन्तजार नहीं करना होता ..........

ये बारिश तो बारहमासी है ..... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

Wanderer said...

beautiful!

Wanderer said...

beautifully written!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर जी :)