Monday, July 22, 2013

बिंदास मुम्बई भाग ३


 मुंबई की दूसरी किश्त में बात थी वहां के बने  मकान बिल्डिंग मेरी नजर से ...वही बात जो जहाँ रहता है उस को वही जगह पसंद है ..बदलाव बहुत कम लोग झेल पाते हैं और जो झेल लेते हैं वह जीवन में बहुत सुखी रहते हैं ..:) जुहू बीच पर गुटका बेचने वाले (कोई मेहता या माणिक चंद )कुछ नाम साफ़ नहीं हुआ का महल नुमा बंगला देखा और उसी की दिवार से लगे ठेले पर कई तरह के दोसे खाए । उसके दूसरी तरफ गोदरेज का महल था हरे बड़े बड़े चिक या पर्दो से ढका  हुआ । जुहू समुन्दर का किनारा कूड़े के ढेर में तब्दील था पर इस पर बने बंगलों पर रहने वालों की अपनी ही दुनिया थी ...घर के पीछे की दिवार पर क्या नजारा है कौन देखे ..खिड़की से दिखने वाला समुन्द्र तो अपनी लहरों से लुभा ही लेता है न :) वैसे यहाँ के मशहूर जगह के बारे में  सब जानते हैं और सबको भाते भी हैं .जुहू  ,चौपाटी ,गेटवे ऑफ इंडिया ,होटल ताज .. सब देखा ..कुछ याद भी था हल्का सा और  जो सबसे अधिक याद था वो था एलिफेंटा  केव्स देखना वहां जाने के इरादा तो मन ने ठान ही लिया था ...क्यों कि बच्चे साथ होने के कारण सिर्फ हीरो हिरोइन के घर देखने में अधिक रूचि  रख रहे थे । पहले दिन की टैक्सी में तो पूरा दिन और आधी रात इसी कार्य को समर्पित  कर दिया गया ..हाजी अली भी दूर से देखा बारिश बहुत तेज थी तय हुआ कि  आते हुए जाया जाएगा पहले अभिताभ बच्चन का घर .देखना उन्हें अधिक सही लग रहा था :) बच्चे हैं माननी पड़ी उनकी बात ...जलसा .प्रतीक्षा बाहर से न सिर्फ देखे गए वरन उनके बाहर खड़े गार्ड से पूरे  परिवार की  जानकारी भी ली गयी ..जैसे हम  लोग उनके घर आमंत्रित थे और अफ़सोस कि  वह लोग घर पर नहीं थे ..:) यह बात और है कि  हर बड़े एक्टर के गार्ड ने यही कहा वह घर पर नहीं चाहे शाहरुख खान के गार्ड हो या सलमान खान के ..:) किसी के घर महल और सलमान के घर को देख कर निराश हुए :) अब पूछे कोई इन  बच्चो से कि क्या ख़ास बात है उनके रहने में ...कमाते हैं इतना तो रहेंगे भी वैसे " यार रहने दो वह भी इंसान है जैसे हम रहते हैं वैसे वह भी ..:) पर याद आया कि  हम भी कभी उम्र के इसी दौर से गुजरे हैं :) वह दिन तो लगता है इसी कार्य के लिए था ..दो कार में थे सब लोग ...घूमते जा रहे हैं ..भाई किस तरफ जाना है कोई पता नहीं आगे वाली कार में बच्चे थे सभी और हम बड़े  पीछे उनको फालो कर रहे थे ..पाली हिल एरिया में ही थे और जब कार रुकी तो सामने राजकपूर का कृष्णा राज बंगला था उफ्फ्फ बच्चे रणधीर कपूर को देखने के लालच में फ़ोन से उनेक घर का रास्ता तलाशते हुए वहां पहुचं ही गए ...सही कहूँ तो लालच तो था हमें भी था इस जगह को देखने का ..अभी वहां से बाहर खड़े उनके बंगले को देख ही रहे थे और बच्चो के पूछने पर की घर पर कोई नहीं है गार्ड्स का रटा रटाया जवाब सुन कर वापिस होने को ही थे कि  गेट खुला और  सामने की आती गाडी में रणधीर कपूर दिखा !वावो था!!! लो जी हो गयी मुंबई यात्रा सफल :) उस से पहले जुहू पर घूमते हुए एक बड़ा सा डॉग देखा था वहां बैठे नारियल वाले ने बताया था कि  यह एक्टर गोविंदा का डॉग है रोज़ शाम को घुमने आता है यहाँ :) तो बच्चे कह रहे थे कि  दिल्ली जा कर क्या कहेंगे की वहां देखा तो क्या देखा सिर्फ गोविंदा का डॉग चलो जी बच्चो की मुराद के साथ हमारे दिल को ठंडक मिल ही गयी आखिर :) ...उस वक़्त  आठ बजे थे मुंबई में देर रात का कोई पंगा तो देखा नहीं था सो नरीमन पॉइंट पर जा का बैठा गया और वहीँ  बैठ कर समुंदरी ठंडी हवा में चाय काफी भुट्टे का आनंद लिया गया सबसे बढ़िया समुद्नर का किनारा वही लगा मुझे तो ..मौज में आये तो ऊँचे सुर में गाना शुरू कर दिया ..मुंबई वाले शायद दिल्ली की इस बिंदास अदा  से हैरान हुए सो कुछ देर बाद देखा की भरा होने के बावजूद हमारे  आस पास खाली एरिया था इतना कि हम वहीँ पैर फैला कर लेट गए :) सुर -  ताल से क्या लेना दिल की मौज है जब आई तभी बह लिए गानों में ..जगह तो मिली भरपूर :)वहीँ बैठ कर अगले दिन का कार्यक्रम बनाया गया कि एलिफेंटा केव्स जरुर देखी जायेगी इस में भी दो लालच थे एक तो बच्चो ने समुन्दर में बोट में सैर की थी जो बारिश आने के  कारण बहुत रोमंचक लगी थी तेज बारिश में बोट के उपरी हिस्से में बैठा जाना कभी भूल नहीं पाउंगी ..क्या नजारा था ..पानी ही पानी .समुन्दर की लहरों का पानी ऊपर से तेज बरसता पानी ..और क्या चाहिये था खुश होने के लिए :) और दूसरा वह ही कुछ याद था बाकी मुंबई भूल रहा था और अधिक बदलाव भी नहीं लगा था .वही भगम भाग वही  अपने से ही मतलब ..कोई किसी से कोई न वास्ता रखने वाला अपनी दुनिया में कहीं लॉस्ट ..वैसे यह बात मुंबई की पसंद भी आई ..आस पास कुछ भी हो ..कूड़ा है बिल्डिंग है ..जाम है भागमभाग  है ........साइड में लिखा है बोर्ड पर "यहाँ पर गलत हरकत करने पर जुर्माना किया जाएगा" पर परवाह किसे है  और इस लिए फिर भी शायद वहां की हवा में रोमांच है रोमांस है ..खुलापन है ..कोई कुछ भी कैसे भी है किसी का ध्यान नहीं ..बस अपनी दुनिया अपनी सपनो की रूमानियत ..युवा .अधेड़ ,उम्र का कोई लेना देना नहीं इस रोमांस से सब कोई अपनी ही रूमानियत में ..बहन ने  कहा भी बच्चे तो बच्चे ....बाप रे बाप !!!  ..या वहां दिल्ली के मुकाबले रोमांस की जगह बहुत है:) ....दूर दूर तक फैला समुन्दर का किनारा ..और वह नमकीन हवा  या तो तेजी से असर करती है या यहाँ की मस्त रहने की वजह इसका कारण है | दिल्ली में इतना खुलापन नहीं है ..यहाँ की हर हरकत पर नजर रहती है आने जाने वालों की । लोदी गार्डन .हुमायूं  टॉम्ब .इंडिया गेट आदि जगह पर जोड़े डरे सहमे से बैठे हुए दिखते हैं कुछ पुलिस  की तेज नजर और  कुछ आने  जाने वाले यूँ घूरेंगे कि  इश्क भी तोबा कर उठे :) पर मुंबई वाकई बिंदास है ..हर शहर का अपना यही अंदाज़ उसको दसरे शहर से जुदा कर देता है ...
मुंबई की बात हो और "सी लिंक "की बात न हो तो थोड़ी गलत बात है ..इंसान का बनाया एक खूबसूरत   अजूबा जो अपनी सुन्दरता और बनावट से वाकई दिल मोह लेता है...उस पर जाना वो भी बारिश के मौसम में जन्नत सा महसूस करवा देता है । मुंबई की समुद्नर की लहरों को देखना और उनसे बाते करना मेरा प्रिय शगल रहा .बहुत लकी है मुंबई वाले कि  उनके पास समुन्दर है .:)वहां की फेमस खाऊ  गली से मुंबई के फेमस स्ट्रीट फ़ूड खा कर और कई तरह के शेक पी कर ख़ुशी हुई ..मुंबई खाने पीने के मामले में दिल्ली से सस्ता है ..यहाँ आराम से कम रकम में बड़ा पाव  खा कर पेट भरा जा सकता है शायद यही कारण है की मुंबई के बारे में सही कहा जाता है यहाँ जो भी आता है वह भूखा नहीं सोता ....और साथ ही बीतती शाम के साथ आती है याद यह खूबसूरत गजल तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे ......मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे...........

,,अगले अंक में जारी है एलिफेंटा केव्स और लोनावाला की मुंबई से वहां तक जाने वाले   सुन्दर रास्ते  की बात ................

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

मुम्बई का अपना स्वरूप अपना आनन्द..

दिगम्बर नासवा said...

मायानगरी का आनंद अलग ही मज़ा देता है ... गज़ल के छोत्रों के साथ मन भी घूम रहे हैं आपके साथ ...

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जानिए क्या कहती है आप की प्रोफ़ाइल फोटो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Mukesh Kumar Sinha said...

:) hame bhi mumbai jana hi padega :)

ashish said...

मुंबई में अनुशासन अभी भी देश की किसी शहर की तुलना में अच्छा है. पढ़ रहे है आपकी मुंबई भ्रमण की यादें .