Friday, March 01, 2013

छुअन



टेसू के फूलों में
महकता मौसम है
बहुत नाजुक नशीली
एक छुअन है ....
न जाने क्या बात है
बहुत बैचेन सा मन है..

खिलती हुई सुबह सुनहरी
सांझ के पलकों में हुई मैली
करवट दर करवट बदले रात फिर से
न जाने क्यों दिल में जलन है ...
बहुत बैचेन सा मन है ....

फागुनी हवा के झोंके सताए
नयन प्यासे किस तरह पता उनका पाए
महकी हुई फिजा में क्यों यह अजनबीपन है
एक मीठी मीठी सी रगों में दुखन है ....
बहुत बैचेन सा मन है ....

कैसी है यह बेबसी
जो दिल समझ न पाए
बेजुबान हो कर हर आहट
बुझते सितारों में खो जाए
हर तरफ ख़ामोशी
मेरी बाहों में सूना गगन है
न जाने आज क्यों बैचेन मन है
यादों की दिल में नर्म नाजुक सी छुअन है !!!
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