Wednesday, March 13, 2013

कुछ दोस्तों की कलम से ..6 ..:)

कुछ दोस्तों की कलम से ..बहुत ख़ुशी होती है दिल को जब इतने प्यार से स्नेह से लिखे हुए शब्द मिलते हैं और दिल में गहरे असर करते हैं ....लिखा हुआ सार्थक नजर आता है ..तहे दिल से शुक्रिया आप सब के स्नेह का ...आज के दो विचार अरुन और अरुन के हैं ..:)

कुछ मेरी कलम से" कविता संग्रह पर मेरे विचार ......अरुन शर्मा अनंत

"कुछ मेरी कलम से" कविता संग्रह एक सुन्दर सोच का अच्छा सृजन है जो पाठक को अपनी ओर आकर्षित करता है. यह सुन्दर कविता संग्रह एक बार जो पढ़ना शुरू करता हूँ तो अंत तक पढ़ने को विवश करता है. कवयित्री ने सम्पूर्ण जीवन के उतार चड़ाव को बहुत ही बारीकी से जाना पहचाना और फिर भाव रूपी कलम से ह्रदय की पूर्ण व्यथा इस पुस्तक में भर दी. "कहा सुना" से शुर हुआ प्रेम का अद्भुत सुन्दर मनभावन सफ़र "अनकहा चाँद" तक जाते जाते पाठक के ह्रदय को भेदता हुआ रोम रोम में समावेश हो जाता है. कुछ पंक्तियों के भाव जितने गहरे हैं उन्हें उतनी ही सरलता से पिरोया भी है जो कि मुझे अवाक कर जाता है.
"कुछ मेरी कलम से" का यह सुन्दर संग्रह, कविता का ऐसा सुन्दर संगम है, जिसमे डूबकर आत्मा तृप्त हो जाती है. इसमें सूरज की तपती धूप है, चाँद की शीतलता है, वियोग की व्यथा है तो प्रेम मिलन का सुन्दर वर्णन भी है, इसमें पतझड़ भी है वसंत भी है.
आदरणीया रंजू जी आपकी "कुछ मेरी कलम से" कविता संग्रह पाठक ह्रदय स्पर्शी है, आप एक अच्छी और बेहतर कवयित्री हैं यह संग्रह इसका प्रमाण है. कुछ और अधिक कहने के लिए शब्द नहीं हैं कुछ पंक्तियाँ जो कविता समाप्ति के बाद स्वतः मन में उभर आईं आपको सादर भेंट कर रहा हूँ स्वीकार करें.

हर पंक्ति प्रेम में भीगी है,
शब्द-शब्द रसीले मीठे हैं,
भावों का सागर गहरा है,
पाठक ह्रदय में ठहरा है,
कविता की सुन्दर फुलवारी,
मन भावन निर्मल है प्यारी,
यह संग्रह प्रेम का चन्दन है,
हे कवयित्री आपको वंदन है।।

सादर
अरुन शर्मा 'अनंत'


नीचे लिखी पंक्तियाँ बहुत ही सुन्दर है जो बहुत दिल को अभिभूत कर रही रही है ..शुक्रिया अरुन तहे दिल से इस स्नेह के लिए ... 



आपकी कविताओं की किताब मिली ! पढकर बहुत अच्छा लगा ! शुरू में किताब का नाम पढकर लगा कि कुछ और होना चाहिए था ! लेकिन जल्द ही सोच बदलती गई ! जब पढ़ने लगा तो पढते पढते सोचा कि जल्द ही खत्म कर लूँगा लेकिन कविताएँ पढता गया और डूबता गया ! कविताएँ मन की मासूम उँगलियाँ थामे उसे अपने साथ बहुत ऊँचे अंतरिक्ष में ले जाती हैं ! कहीं कहीं किसी पंक्ति पर आँखें अटक गईं तो फिर आगे बढ़ने का मन नही किया ! कहीं कविताएँ प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा को छूती हैं तो कभी उलाहना को भी मिश्री सा मीठा बना देती हैं ! कहीं प्रौढ़ सोच तो कहीं अल्हड़पन ! परिपक्वता ये कि कभी नायिका अपने प्रिय से शिकायत करती है कि जब परिस्थितियां प्रतिकूल तो तुमने मुझे पुकारा क्यों नही , और कभी ऐसी बेफिक्री कि वो पहली बारिस में भीगना चाहती है टपकते हुए छत की मरम्मत से पहले ! कविताएँ तो मानों स्त्रियों का सम्पूर्ण मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कर रही हों ! उम्र , वर्ग आदि से परे सिर्फ एक प्रतिनिधि की तरह ! निश्चित ही खुद से जुड़े लोगों के मनोभावों को समझने में मदद मिलेगी मुझे इस किताब को पढकर ! इससे बड़ी उपयोगिता और क्या होगी कि कोई किताब अनुभव बनकर जीवन में उतरे !
अब जब पूरा पढ़ चूका हूँ तो समझा कि इस विविधरंगी कविताओं के भरे गुलदस्ते को किसी शीर्षक से न बांधकर यही लिखना ठीक था “कुछ मेरी कलम से” !
और हाँ , सबसे खूबसूरत पन्ना वो लगा जिसपर आपने लिखा था “प्रिय अरुन को शुभकामनाओं सहित” :-) ! सादर !

5 comments:

vandana gupta said...

्बहुत खूबसूरत समीक्षा बधाई रंजू जी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

प्रियवर अरुण जी ने लिखा है तो पुस्तक तो भढ़िया होगी ही!
सादर!
डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
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प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर समीक्षा..

अरुन शर्मा 'अनन्त' said...

आदरणीय गुरुदेव श्री सादर प्रणाम, आपका स्नेह ह्रदय से स्वीकार्य है आप जैसे पिता समान गुरु नसीब वालों को मिलते हैं मैं उनमें से एक हूँ. हार्दिक आभार आपका

Randhir Singh Suman said...

nice