Tuesday, January 08, 2013

एन्जॉय चाय की चाह ..........:)

ठण्ड के मौसम में चाय की चाहत के बिना चैन कहाँ ..पर यह चाय कहाँ से कैसी आई ...?जानिये तो सही जरा ... चाय के सम्राट शेनतुंग ने खोजी चाय २७३७ इसवी पूर्व चीन का सम्राट था शेनतुंग ..वह अक्सर बीमार रहता एक दिन उसके वेद्ध ने कहा पानी उबाली ठंडा करके पीते रहो बादशाह ने वैसा ही किया ..बहुत दिनों तक यही चलता रहा एक दिन राजमहल के रसोईघर में पानी उबाला जा रहा था हवा चली ,कुछ पत्तियां उड़ती हुई आई उबलते पानी में गिर गयीं इसी पानी को सम्राट ने पी लिया उसको पानी का स्वाद कुछ बदला बदला सा लगा और पसंद भी आया बस फ़िर क्या था राजा ने वैसी ही पत्तियां मंगवाई और उबाल कर पीता रहा ...यह कर्म जारी रहा इसको देख कर अन्य लोगों ने भी इसको इस तरह से पीना शुरु कर दिया । चीनी लोगी ने इसको ""चाह"" कहना शुरू कर दिया वही ""चाह"" बाद में "चाय" कहलाई जैसे जैसे यह अन्य देशों में गई वहां अलग अलग नाम दे दिए गए जैसे भारत में इसको "चाय "कहा और अंग्रजी में यह "टी "कहलाई सबने इसको अपने स्वाद में ढाला और खूब इसका स्वागत किया इस समय विश्व में प्रति चाय की खपत के हिसाब से आयरलैंड प्रथम ब्रिटेन दूसरे तथा कुवेत तीसरे स्थान पर आते हैं इस तरह सम्राट के इस उबले पानी ने हमें चाय से परिचित करवा दिया ..एक बार बहुत पहले चाय पर लिखी थी कुछ पंक्तियाँ मैंने कि .. काश ........ उसका दिल एक चाय की केतली सा होता जिसको बार बार गर्माना न पड़ता पर उसका दिल तो कम्बखत बर्फ सा निकला जो सर्द आहों से भी पिघल नहीं पाता है नज़रों से करे चाहे इशारे कितने वह नासमझ इस चाह को समझ न पाता है :):) चलिए जी चाह की चाहत को समझे न समझे कोई ..पर चाय की चाह सबको इस सर्द मौसम में राहत दे जाती है :) एन्जॉय चाय की चाह ..........:)
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