Wednesday, December 19, 2012

टीस

गर्भ में आते ही जान लिया था मैंने
कि लड़की का जन्म लेना इस युग में
इतना आसान नही होता
सहनी पड़ती है हर टीस
चलाना पड़ता है यहाँ
जलते अंगारों पर
आई गर्भ में तो लगा
जैसे बाहर अजब सी
हुई है कुछ हलचल

सुनाई देती मुझे भीतर
माँ की सिसकियाँ
और पापा का परेशान सा
कोई स्वर सुनाई देता था

वेदना की साँसे
इस क़द्र थी गहरी
कि अपनी हर धड़कन
एक टीस देती सी लगती था

नासमझ मैं क्या जान पाती
कि मेरा गर्भ में होना
कोई खुशी का सबब नही
एक वेदना है एक टीस है
जो देगी उम्र भर ऐसी पीड़ा
जिसका हल शायद पिता को
एक बहुत बढे कर्जे से ,
माँ को दुनिया के तानों से
सिर्फ़ चुकाना होगा

20 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सिसके वातावरण विषैला,
शान्ति कहाँ है, दिग्भ्रम फैला।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

जिसका हल शायद पिता को
एक बहुत बढे कर्जे से ,
माँ को दुनिया के तानों से
सिर्फ़ चुकाना होगा,,,,

बेहतरीन,सुंदर रचना,,,,

recent post: वजूद,

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

जिसका हल शायद पिता को
एक बहुत बढे कर्जे से ,
माँ को दुनिया के तानों से
सिर्फ़ चुकाना होगा,,,,,

बेहतरीन,सुंदर रचना,,,,

recent post: वजूद,

sushma 'आहुति' said...

गहन अभिवयक्ति......

expression said...

रंजू मन भीग गया इसको पढ़ कर...
व्यथित हो गया..

सस्नेह
अनु

Kailash Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी रचना...

Maheshwari kaneri said...

बहुत दर्द किन्तु कटु सत्य ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 20 -12 -2012 को यहाँ भी है

....
मेरे भीतर का मर्द मार दिया जाये ... पुरुष होने का दंभ ...आज की हलचल में .... संगीता स्वरूप
. .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 20 -12 -2012 को यहाँ भी है

....
मेरे भीतर का मर्द मार दिया जाये ... पुरुष होने का दंभ ...आज की हलचल में .... संगीता स्वरूप
. .

vandana gupta said...

अपने इस दर्द के साथ यहाँ आकर उसे न्याय दिलाने मे सहायता कीजिये या कहिये हम खुद की सहायता करेंगे यदि ऐसा करेंगे इस लिंक पर जाकर

इस अभियान मे शामिल होने के लिये सबको प्रेरित कीजिए
http://www.change.org/petitions/union-home-ministry-delhi-government-set-up-fast-track-courts-to-hear-rape-gangrape-cases#

कम से कम हम इतना तो कर ही सकते हैं

Pankaj Kumar Sah said...

बहुत खूब .... आप भी पधारो पता है http://pankajkrsah.blogspot.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

माता पिता की मजबूरी और बेटियों की टीस .... गहन अभिव्यक्ति

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

dndInfotainment p said...

Hi,
I am from Virat Bharat I read This Blog. Your Poetry Is really very nice. Really Good If you Want to see our Site You can easily Visit http://viratbharatnews.blogspot.in/

Thanking You
Puneet Kardam

Anju (Anu) Chaudhary said...

हर युग की एक सी कहानी

दिगम्बर नासवा said...

व्यथा को शब्द दिए हैं आपने ...
गहरे दर्द की अनुभूति कराती है रचना ...

संजय भास्कर said...

मर्मस्पर्शी रचना..

मैं और मेरा परिवेश said...

मेरी बिटिया अभी अभी इस धरती पर आई है। पता नहीं संसार का सलूक उसके साथ कैसे होगा? ईश्वर उसे और बेटियों को इस गहन पीड़ा से बचाए

Madan Mohan Saxena said...

बेह्तरीन अभिव्यक्ति

GYanesh Kumar said...

ठीस नामक काव्य पढ़ने और समय का सत्य समझने के बाद मुझे जो लगा वह एक सामान्य से काव्य में प्रकट कर रहा हूँ युगों से पीड़ित नारी आज भी परेशान है मुक्ति व स्वतंत्रता की चाह में अपने ही पहरे में परेशानी की इन्तहा हो गयी हैं सड़को देर सवेर निकलना भारी है काव्य पढे़।जो समझ आया वह शव्दो में ढ़ाला है वैसे में कोई कवि नही हूँ केवल एक ब्लागर हूँ।
नारी ,नारी ,नारी
जंग अभी तक जारी
दिन वीते वीते महिने और वीत गये है कितने युग।
पर मिटी नही तो केवल नारी तेरी पीड़ा गीले दृग।।
तूने ही पुरुष को दिया जन्म जिसने दी तुझको पीडा़।
सबसे ज्यादा नारी तुझको दी तूने ही पीड़ा।।
नारी पर शासन नारी का नारी पर प्रशासन नारी का ।
नारी पर त्रास नारी का नारी पर नारी को दुख भी नारी का ।।
नारी पर नारी ही भारी जिसका शासन अब भी जारी।
मजा ले रहा पुरुष वन अत्याचारी।नारी पर नारी की पीड़ा भारी।।यह जंग अभी भी जारी ।।