Wednesday, December 19, 2012

टीस

गर्भ में आते ही जान लिया था मैंने
कि लड़की का जन्म लेना इस युग में
इतना आसान नही होता
सहनी पड़ती है हर टीस
चलाना पड़ता है यहाँ
जलते अंगारों पर
आई गर्भ में तो लगा
जैसे बाहर अजब सी
हुई है कुछ हलचल

सुनाई देती मुझे भीतर
माँ की सिसकियाँ
और पापा का परेशान सा
कोई स्वर सुनाई देता था

वेदना की साँसे
इस क़द्र थी गहरी
कि अपनी हर धड़कन
एक टीस देती सी लगती था

नासमझ मैं क्या जान पाती
कि मेरा गर्भ में होना
कोई खुशी का सबब नही
एक वेदना है एक टीस है
जो देगी उम्र भर ऐसी पीड़ा
जिसका हल शायद पिता को
एक बहुत बढे कर्जे से ,
माँ को दुनिया के तानों से
सिर्फ़ चुकाना होगा
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