Monday, October 08, 2012

मन के शब्द

यूँ ही बैठे बैठे
रेत पर उकेरते  -लिखते
कुछ शब्द
देख कर न जाने क्यों
दिल कांपने सा लगता है
 कि कहीं यह
थरथराती  उंगलियाँ
कहने न लगे
वो मन के शब्द
जो दिल की अंतस
गहराइयों में छिपे हैं
गहरे भीतर दूर कहीं
और मन है कि
मंडराता रहता है
उन्ही शब्दों के आस पास
उन्हीं से टकराते हुए
मन के भंवर
उन्ही शब्दों के अर्थ से
कतराते हैं ............
तब उन,
अर्थों की मौन भाषा
हम कहाँ ,कब समझ पाते हैं
जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर
सच की .......
अस्तित्वहीनता को ठुकराते हैं
पर जब जान ही लेते हैं
कि ज़िन्दगी
कभी चलती नहीं समानांतर
रेत पर फिर -फिर अनकहे निशाँ
बनाते हैं .................

24 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जीवन यूं ही चलता रहता है

Mukesh Kumar Sinha said...

ret par ukerte shabd aur fir samundra ki lahren unko mitati hui:)
aisa hi chalta hai na man me:)

expression said...

बहुत सुन्दर ....
हर लफ्ज़ दिल को छूता हुआ....
देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर ..
वाह...

अनु

Dheerendra singh Bhadauriya said...

अर्थों की मौन भाषा
हम कहाँ ,कब समझ पाते हैं
जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर,,,,

भाव पूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति,,,,,

RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

Maheshwari kaneri said...

अर्थों की मौन भाषा
हम कहाँ ,कब समझ पाते हैं
जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर ....बहुत सुन्दर भाव..

रंजना [रंजू भाटिया] said...

haan yahi sahi kaha tumne mukesh

रंजना [रंजू भाटिया] said...

जी हाँ काजल जी जीवन कब रुका

रंजना [रंजू भाटिया] said...

thanks anu ..:)

रंजना [रंजू भाटिया] said...

shukriya aapka bahut bahut

रंजना [रंजू भाटिया] said...

shukriya maheshwari ji

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर
सच की .......
अस्तित्वहीनता को ठुकराते हैं

पूरी नज़्म ही गहन भावों से ओत -प्रोत

Rajput said...

जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर ..
बहुत सुन्दर .

Suman Dubey said...

RANJU JI NAMSKAR, SUNDAR LIKHA HAI --------प्यार को शर्तों से तौल कर ..
बहुत सुन्दर .

ashish said...

आप की कलम से मन के शब्द , अद्वितीय भाव पिरो लाये है . लिखते जाइये वो शब्द कभी ना कभी तो जिंदगी की परिधि को स्पर्श करेंगे .

वन्दना said...

ज़िन्दगी भी तो रेत पर पडे निशाँ जैसी है

प्रवीण पाण्डेय said...

शब्दों को बहना आता है,
नहीं ठिठक सहना आता है,
मौन नहीं स्थिर इस जग में,
उसे बहुत कहना आता है।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut hee sundar...!

निर्मला कपिला said...

अर्थों की मौन भाषा
हम कहाँ ,कब समझ पाते हैं
जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर .
मन की गहराईयों से निकले भाव। बहुत खूब!

सदा said...

अर्थों की मौन भाषा
हम कहाँ ,कब समझ पाते हैं
जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर ...
वाह .. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

Anju (Anu) Chaudhary said...

जिंदगी की रेत पर पड़े निशाँ ...पानी की हल्की सी लहर के साथ बह जाते हैं

rashmi ravija said...

जानते हैं कि देना पड़ता है
कुछ पाने से पहले
प्यार को शर्तों से तौल कर
सच की .......
अस्तित्वहीनता को ठुकराते हैं

सच बयाँ कर दिया ,इन शब्दों ने
भावपूर्ण..सुन्दर कविता

rpbpl said...

निम्न पंक्तियाँ आपकी इस कविता की रीढ़ हैं

उन्ही शब्दों के आस पास
उन्हीं से टकराते हुए
मन के भंवर
उन्ही शब्दों के अर्थ से
कतराते हैं ............

इनमें धुप की गर्मी तो हैं पर तीखे तेवर हट कर मृदु छाँव भी आगई हैं ..बहुत खूब रंजना जी

हरकीरत ' हीर' said...

और मन है कि
मंडराता रहता है
उन्ही शब्दों के आस पास
उन्हीं से टकराते हुए

आपने तो फिर उदास कर दिया रंजना जी .....:))

Anjana kumar said...

सुन्दर कविता...