Monday, March 05, 2012

यह नशा सब बसन्ती बयार का है

छलक रहा है जो रंग नजरों से 
यही तो रंग सजना  प्यार का है

दिल में उठ रही  हैं जो धीरे से हिलोरे
यह नशा सब  बसन्ती बयार  का है

उड़ा के ले गया है चैन और करार मेरा
आंखो में ख्वाब इन्द्रधनुषी बहार का है

पलकों में बंद है बस एक सूरत तेरी
दिल में नशा तेरे ही दुलार का है
 
निहारूं  हर पल मैं  राह तुम्हारी
इस दिल को इन्तजार तेरे दीदार का है

बिखरे है फिजा में जो रंग टेसू के
ऐसा ही सपना तेरे मेरे संसार का है
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