Monday, February 27, 2012

याद के पल

जीवन की रेल पेल में
हर संघर्ष को झेलते
हर सुख दुःख को सहते
कभी मैंने चाही नही इनसे मुक्ति
पर कभी बैठे बैठे यूं ही अचानक
जब भी याद आई तुम्हारी
तब यह मन आज भी
भीगने सा लगता है
चटकने लगते हैं तन मन में
जैसे मोंगारे के फूल
और जैसे सर्दी से कांपते बदन में
तेरी याद का साया
गुनगुनी धूप सी भर देता है

छेड़ता नहीं है कोई सरगम को
फ़िर भी एक संगीत दिल में
गूंजने लगता है ..
उतर जाते हैं कई आवरण
उन यादो से .
जिन्हें दिल आज भी संजोये हुए हैं
नही पड़ने देता दिल
 इन पर वक्त का साया
 क्यों कि यही कुछ याद के पल
इस तपते जीवन को
एक ठंडी छाया देते हैं
जीवन के कड़वे यथार्थ  को
कुछ तो समृद्ध बना देते हैं !!

12 comments:

shikha varshney said...

यादें संबल होती हैं जीवन की.
सुन्दर कविता.

प्रवीण पाण्डेय said...

स्मृतियाँ हृदय को ठंड देती हैं..

Kailash Sharma said...

क्यों कि यही कुछ याद के पल
इस तपते जीवन को
एक ठंडी छाया देते हैं

....यादें न हों तो जीना बहुत मुश्किल है..

sushma 'आहुति' said...

यादे ही है जिनके साथ साथ हम जीते है.... अच्छी रचना.....

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत
और कोमल भावो की अभिवयक्ति....

vidya said...

यादें तो आसरा होती है जीने के लिए...
छाँव देती है सफर की धूप में...

बहुत सुन्दर रचना...

काजल कुमार Kajal Kumar said...

☺☺

Arvind Mishra said...

भाव और शब्द की समृद्धता! वाह!

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

सुंदर भाव - आभार

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut hee sundar bhaav...!

दिगम्बर नासवा said...

यादों से तो मुक्ति वैसे भी नहीं मिलती ...उनको संबल बना लो तो जीवन आसान हो जाता है ...

Chirag Joshi said...

sundar kavita