Thursday, September 01, 2011

यूँ दिल के एहसासो को

 
 
 
 
यूँ  दिल के एहसासों  को गीतो में ढाल लूंगी
मिली थी जब तुमसे उस पल को बाँध लूंगी


वक़्त की रफ़्तार थमने ना पाए अब
इन जीवन की उलझनो में कुछ सुलझने सँवार लूंगी

लावे सी पिघल कर बह क्यों  नही जाती है यह ख़ामोशी
ख़ुद को ख़ुद में समेटे कब तक यूँ तन्हा मैं चलूंगी

कुछ सवाल हैं सुलगते हुए आज भी हमारे दरमियाँ
कुछ दर्द ,कुछ आहें दे के इनको फिर से दुलार लूंगी

दे दिया अपना सब कुछ तुझे तन भी और मन भी
अब कौन सी कोशिश से अपने बिखरे वजूद को निखार लूंगी

काटता नही यह सफ़र अब यूँ ही बेवजहा गुज़रता हुआ
एक दास्तान फिर से तुझसे ,अपने प्यार की माँग लूंगी!!

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी

बहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले
अपने इन रतज़गॉं को अब तेरे सपनो से बुहार लूंगी !!
 

29 comments:

वन्दना said...

दिल के अहसासो को बखूबी पिरो दिया…………शानदार दिल को छूती रचना।

प्रवीण पाण्डेय said...

स्वप्नों और स्मृतियों से समय की भीषण नदियों में भी पुल बन जाते हैं।

डॉ. मनोज मिश्र said...

बेजोड़ और दिल को छू लेने वाली रचना ,आभार.

Kailash C Sharma said...

बहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले
अपने इन रतज़गॉं को अब तेरे सपनो से बुहार लूंगी !!

...बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी रचना..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

लावे सी पिघल कर बह क्यों नही जाती है यह ख़ामोशी
ख़ुद को ख़ुद में समेटे कब तक यूँ तन्हा मैं चलूंगी

कुछ सवाल हैं सुलगते हुए आज भी हमारे दरमियाँ
कुछ दर्द ,कुछ आहें दे के इनको फिर से दुलार लूंगी


गहन भावनाएं .. सुन्दर प्रस्तुति ...

sushma 'आहुति' said...

यूँ दिल के एहसासों को गीतो में ढाल लूंगी
मिली थी जब तुमसे उस पल को बाँध लूंगी ....बहुत ही खुबसूरत एहसास को वयक्त किया....

Maheshwari kaneri said...

दिल को छू लेने वाली सुन्दर रचना ....

Anil Avtaar said...

Bahut hi behatareen rachna Bhatiya Ji.. Aabhar...

आशा जोगळेकर said...

बहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले
अपने इन रतज़गॉं को अब तेरे सपनो से बुहार लूंगी !!
आह ये प्यार और ये विरह !
खूबसूरत रचना ।

Vivek Rastogi said...

वक्त की रफ़्तारों में प्यार के रिश्तों की सीमाओं से स्वप्न बुहारने का बेहतरीन काव्यात्मक अभिव्यक्ति ।

प्रवीण कुमार दुबे said...

रूठने को तो चले रूठ के हम उनसे भले, मुड़ के तकते थे के अभी कोई मनाकर ले जाए।

सदा said...

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी

बहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले
अपने इन रतज़गॉं को अब तेरे सपनो से बुहार लूंगी !!
हर पंक्ति बहुत कुछ कहती हुई ... बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

singhSDM said...

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी

पूरी ग़ज़ल अच्छी है ..... भावनाओं से ओतप्रोत......!!!! मार्मिक रचना को प्रस्तुत करने का आभार !!!

Deepak Saini said...

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी

बहुत बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

हरकीरत ' हीर' said...

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी

बहुत खूब ....!!

सुमन'मीत' said...

sundar...

rahil said...

khoobsurat

हरकीरत ' हीर' said...

रंजना जी आपसे अनुरोध है अपनी १०,१२ क्षणिकायें 'सरस्वती-सुमन' में प्रकाशन के लिए दें ..
अपना संक्षिप्त परिचय और तस्वीर भी ....


harkirathaqeer@gmail.com

DR.MANISH KUMAR MISHRA said...

प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के दिसम्बर माह में ०९--१० दिसम्बर (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा चुकी हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (०९ -१० दिसम्बर२०११ ) संगोष्ठी में आप की सक्रीय सहभागिता जरूरी है. दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें . आलेख भेजने की अंतिम तारीख २५ सितम्बर २०११ है. मूल विषय है-''हिंदी ब्लागिंग: स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं ''
आप इस मूल विषय से जुड़कर अपनी सुविधा के अनुसार उप विषय चुन सकते हैं

जैसे क़ि ----------------
१- हिंदी ब्लागिंग का इतिहास

२- हिंदी ब्लागिंग का प्रारंभिक स्वरूप

३- हिंदी ब्लागिंग और तकनीकी समस्याएँ
४-हिंदी ब्लागिंग और हिंदी साहित्य

५-हिंदी के प्रचार -प्रसार में हिंदी ब्लागिंग का योगदान

६-हिंदी अध्ययन -अध्यापन में ब्लागिंग क़ी उपयोगिता

७- हिंदी टंकण : समस्याएँ और निराकरण
८-हिंदी ब्लागिंग का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

९-हिंदी के साहित्यिक ब्लॉग
१०-विज्ञानं और प्रोद्योगिकी से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

११- स्त्री विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

१२-आदिवासी विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

१३-दलित विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
१४- मीडिया और समाचारों से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
१५- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से धनोपार्जन

१६-हिंदी ब्लागिंग से जुड़ने के तरीके
१७-हिंदी ब्लागिंग का वर्तमान परिदृश्य
१८- हिंदी ब्लागिंग का भविष्य

१९-हिंदी के श्रेष्ठ ब्लागर

२०-हिंदी तर विषयों से हिंदी ब्लागिंग का सम्बन्ध
२१- विभिन्न साहित्यिक विधाओं से सम्बंधित हिंदी ब्लाग
२२- हिंदी ब्लागिंग में सहायक तकनीकें
२३- हिंदी ब्लागिंग और कॉपी राइट कानून

२४- हिंदी ब्लागिंग और आलोचना
२५-हिंदी ब्लागिंग और साइबर ला
२६-हिंदी ब्लागिंग और आचार संहिता का प्रश्न
२७-हिंदी ब्लागिंग के लिए निर्धारित मूल्यों क़ी आवश्यकता
२८-हिंदी और भारतीय भाषाओं में ब्लागिंग का तुलनात्मक अध्ययन
२९-अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी ब्लागिंग क़ी वर्तमान स्थिति

३०-हिंदी साहित्य और भाषा पर ब्लागिंग का प्रभाव

३१- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से रोजगार क़ी संभावनाएं
३२- हिंदी ब्लागिंग से सम्बंधित गजेट /स्वाफ्ट वयेर


३३- हिंदी ब्लाग्स पर उपलब्ध जानकारी कितनी विश्वसनीय ?

३४-हिंदी ब्लागिंग : एक प्रोद्योगिकी सापेक्ष विकास यात्रा

३५- डायरी विधा बनाम हिंदी ब्लागिंग

३६-हिंदी ब्लागिंग और व्यक्तिगत पत्रकारिता

३७-वेब पत्रकारिता में हिंदी ब्लागिंग का स्थान

३८- पत्रकारिता और ब्लागिंग का सम्बन्ध
३९- क्या ब्लागिंग को साहित्यिक विधा माना जा सकता है ?
४०-सामाजिक सरोकारों से जुड़े हिंदी ब्लाग

४१-हिंदी ब्लागिंग और प्रवासी भारतीय


आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें



डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
हिंदी विभाग के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय

गांधारी विलेज , पडघा रोड
कल्याण -पश्चिम, ,जिला-ठाणे
pin.421301

महाराष्ट्र
mo-09324790726
manishmuntazir@gmail.com
http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/
http://kmagrawalcollege.org/

दिगम्बर नासवा said...

बहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले
अपने इन रतज़गॉं को अब तेरे सपनो से बुहार लूंगी .

जज्बातों को शब्द दे दिए हैं ... बहुत कोमल एहसास सिमित आए अहिं इस रचना में ... लाजवाब ...

अनामिका की सदायें ...... said...

waah ji kya baat hai...ek jabardast umda gazal jo itne gahre ehsaso se labrez hai....to ji jaldi kariye kuchh to.

रंजना said...

वाह...वाह...वाह...

प्रेमपूर्ण कोमल भावों को क्या सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आपने...

बहुत ही सुन्दर रचना...

Deepak Sharma said...

एहसास हुआ सच में

Sunil Kumar said...

मत बांधो प्यार को किसी रिश्ते की सीमाओं में
बस एक तेरे नाम पर अपना यह जीवन गुज़ार लूंगी
.बहुत सुन्दर, दिल को छूती रचना.....

Udan Tashtari said...

देर से आये...दुरुस्त आये और भरपूर आनन्द उठाये.

Ankit pandey said...

एक-एक शब्द भावपूर्ण ...
संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

हर शेर उम्दा....एक से बढकर एक......

chirag said...

bahut khoob...really a sweet poem

Suman Dubey said...

रंजू जी नमस्कार्। बहुत सुन्दर एह्सास हैबहुत थक चुकी हूँ अब कही तो सकुन की छावँ मिले--------भावपूर्ण है।