Friday, March 25, 2011

न जाने क्यों ??

न जाने क्यों
ठहरे हुए पानी की तरह
मेरे लफ्ज़ भी काई से
कहीं मन में
ठिठक गए हैं ,
सन्नाटे की
आहट में
न कोई एहसास
न आंसुओं की
गिरती बूंदें
इसमें कोई
लहर नहीं बनाती
पर इस जमे हुए
सन्नाटे में
तेरे होने की
सरसराहट सी
एक उम्मीद जगाती है
की कहीं से प्रेम की
अमृत धारा
फिर से इन जमे हुए
एहसासों में
कोई लहर दे जायेगी
और फिर कोई
नयी कविता
पन्नो पर बिखर जायेगी !!!

13 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सुन्दर रचना!
लहरें तो मन के सागर में उठती ही रहती हैं!
जो भा जाए
वही कविता बन कर पन्नों पर आ जाती है!

Udan Tashtari said...

बहुत भावपूर्ण रचना.

chirag said...

bahut khoob jee
apaki har kavita main khas bat hoti hain
http://iamhereonlyforu.blogspot.com/
mere blog par bhi apana aashirvad banaye rakhiyega

सदा said...

फिर कोई
नयी कविता
पन्नो पर बिखर जायेगी !!!

बहुत खूब ।।

इंदु पुरी गोस्वामी said...

एक उम्मीद जगाती है
की कहीं से प्रेम की '

'एक उम्मीद जगाती है
कि कहीं से प्रेम की '
ठीक???

प्रेम सचमुच 'अमृतधारा है रंजना जी और एहसासों में लहर दे जाता है.प्रेमपगे,प्रेम से सरोबार ह्रदय में ही नही जीवन में कविताओ की रचना कर उसे कवितामय,संगीतमय बना देता है. काई क्यूँ कर जम गई ???? आश्चर्य ! 'ये' मन तो ठहरे हुए जल सा न था, इसमें तो प्रेम की अनवरत धारा हमेशा से प्रवाहित रही है.
जानती हो ....मैं आश्चर्यचकित भी हूँ और......दुखी भी. निसंदेह फिर पन्नों पर उकेरी जायेगी अनगिनत कविताये. सागर नही सूखते कभी. रिमझिम बरसात आती है और भर देती है उसे. बस शांत और धैर्य मन से बरसात के आने की प्रतीक्षा भर करनी होती है वापस.बस और बरसात को आना ही होता है.प्यार.

Sunil Kumar said...

नयी कविता
पन्नो पर बिखर जायेगी
सृजन का एक नया कारण, बहुत सुन्दर बधाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

पर इस जमे हुए
सन्नाटे में
तेरे होने की
सरसराहट सी
एक उम्मीद जगाती है

बहुत सुन्दर ...इंतज़ार है उस सरसराहट का ..वैसे कविता तो बन ही गयी ...

अल्पना वर्मा said...

'उम्मीद/एक आस'...यही तो है जीवन-दीप का तेल..
बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति .

सुमन'मीत' said...

bahut sundar.....

Manav Mehta said...

फिर से इन जमे हुए
एहसासों में
कोई लहर दे जायेगी
और फिर कोई
नयी कविता
पन्नो पर बिखर जायेगी !!!

bahut sundar..

सारा सच said...

nice

Mrs. Asha Joglekar said...

तेरे होने की
सरसराहट सी
एक उम्मीद जगाती है
की कहीं से प्रेम की
अमृत धारा
फिर से इन जमे हुए
एहसासों में
कोई लहर दे जायेगी
और फिर कोई
नयी कविता
पन्नो पर बिखर जायेगी !!!
bahot khoob Ranjana ji.

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति