Monday, July 05, 2010

चंद लफ्ज़ कुछ यूँ ही


रेशमी सपने भी
आंसू के संग बह जाते हैं
वीरान आँखों में
जब यादो के
लम्हे मुस्कारते हैं
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खुद को बहलाने के
अब सब बहाने भी
नाकाम हो चले
जब से दिल ने जाना
कि हर साथ चलने वाला
हमसफर नहीं होता !!
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हकीकत में
ख्वाब
एक फ़साना है
एक साया है दिल में
और उसका चेहरा
खुद बनाना है !!!

रंजना (रंजू ) भाटिया
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