Monday, April 05, 2010

अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये


बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सी
वो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये

दिखता नही नज़रों में इजहार अब किसी भी बात का
अब कहाँ हर इंसान में यह रूप आप तलाशिये

जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!

45 comments:

अल्पना वर्मा said...

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये.

वाह ! बहुत खूब!क्या बात है!
पूरी रचना में अहसासों की सुन्दर बुनावट है.

हेमन्त कुमार said...

"नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये।"

गजब मारक है ..!
आभार..!

sangeeta swarup said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

बहुत खूब....

दर्दे गम इस कदर है जिंदगी में कि
दर्द ना हो तो जिंदगी बेकार लगती है

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!

वाह...बहुत सुन्दर ..

सागर said...

याद नहीं आ रहा किनका है पर एक शेर अर्ज़ है

"नक्शा उठा के देखिये कोई नया शहर
लीजिये इस शहर में तो सबसे मुलाक़ात हो गयी "

यह पोस्ट पढ़ कर यही शेर याद आया/

सीमा सचदेव said...

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!
बदलाव जीवन का नियम है तो हर पल कुछ नया तलाशते ही रहना चाहिए , शायद यही जिन्दगी है । आज पहली बार आपके ब्लाग पर आना हुआ , अच्छा लगा आकर...सीमा सचदेव

विजयप्रकाश said...

बहुत खूब... नया अंदाज तलाशिये.

Ashok Pandey said...

बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सी
वो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

हमेशा की तरह सुंदर रचना। आभार।

Suman said...

nice

डॉ. मनोज मिश्र said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये..
पूरी रचना बेहद खूबसूरत है,बधाई.

सुशील कुमार छौक्कर said...

नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये


हमारे दिल की बात कह दी।

Arvind Mishra said...

वाह गोया खफा होना भी प्यार का एक अहसास है -बहुत खूब रंजना जी !

दिगम्बर नासवा said...

नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये ..

नया शहर भी अगर पत्थरों का हुवा तो क्या कीजेगा ... जो कुछ पाना है यहीं तलाशना पढ़ेगा ...
बहुत अच्छे जज्बातों से बुने हैं सब शेर ...

M VERMA said...

बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सी
वो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये
सुन्दर रचना बहुत खूब

अभिषेक ओझा said...

खफा होना और प्यार... वाह वाह ! मुझे अपनी पोस्ट याद आ गयी: http://ojha-uwaach.blogspot.com/2008/02/blog-post.html

रचना दीक्षित said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये
जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये
जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये
बहुत खूब, नया अंदाज तलाशिये.हमारे दिल की बात कह दी।

राज भाटिय़ा said...

वाह वाह जी बहुत सुंदर ओर अहसासो ओर भावो से भरपुर
धन्यवाद

रचना दीक्षित said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये
जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये
जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये
बहुत खूब, नया अंदाज तलाशिये.हमारे दिल की बात कह दी।

tapashwani said...

bahut hi sundar talash...
badhai!!!!!!!!!!!!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये
बहुत-बहुत सुन्दर रचना है रंजना जी. बधाई.

Shekhar kumawat said...

wow !!!!!!!!!!!!!

bahut khub


पूरी रचना में अहसासों की सुन्दर बुनावट है.

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

कुश said...

क्या बात है..ग़ज़ल की बात..! ये भी खूब अदा है आपकी

बेचैन आत्मा said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये
--वाह!

सतीश सक्सेना said...

लगता है जैसे हकीकत उड़ेल दी हो आपने रंजना जी !
शुभकामनायें

वाणी गीत said...

@ बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सी
वो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये....

बना कर जिन्दगी भूलभुलैया सी ...कहते हैं वो मंजिल कही और तलाशिये ...
वाह ...
@ होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये...
कहा सीखी है जालिम ने अदा या ना रूठ पाने की ....!!
ग़ज़ल बहुत भायी ...

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर!
घुघूती बासूती

हरकीरत ' हीर' said...

बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सी
वो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये

वाह बहुत खूब .....!!
खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

क्या हो सकता है .....??
नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये

दुनिया खत्म हो तो चैन आये .....!

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!

ये लाजवाब बात कही .....!!

बहुत खूब ......!!

Udan Tashtari said...

दिखता नही नज़रों में इजहार अब किसी भी बात का
अब कहाँ हर इंसान में यह रूप आप तलाशिये

-क्या बात कही है, बहुत खूब!!

सुमन'मीत' said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

बहुत खूब

Sanjeet Tripathi said...

ab kaha aur apni manjil talashe-galib......
manjilein kaha koi bar bar badalta hai.....

;)

मोहिन्दर कुमार said...

सुन्दर भाव भरी रचना के लिये बधाई....

मेरे शब्दों में

कुछ दूर यूंही चल कर क्यूं ठहर जाती है जिन्दगी
फ़िर बीती यादों को अक्सर दोहराती है जिन्दगी
पहले पहल तलाशती है अपने लिये इक मुमाम
और फ़िर खुद इक तलाश बन जाती है जिन्दगी

ePandit said...

आपकी सुंदर कविता के लिए तारीफ है कम, टिपण्णी करने के लिए कुछ और तलाशिये

Prem Farrukhabadi said...

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!

सुन्दर भाव भरी रचना के लिये बधाई....

रंजना said...

वाह...वाह...वाह...
गहन भावों की सुन्दर हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति...
बहुत ही सुन्दर रचना ....

rashmi ravija said...

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये.
बहुत खूब ...सुन्दर रचना

Reetika said...

aur shayad yeh talash hi zindagi mein aage badhne ki ek khoobsoorat wajeh hoti hai

अनामिका की सदाये...... said...

दिखता नही नज़रों में इजहार अब किसी भी बात का
अब कहाँ हर इंसान में यह रूप आप तलाशिये

-janaab waqt hi nahi kisi k paas izhaar karne ka....shadiya hi jab net k zariye hone lagi he to kya ummeed kar sakte hai?

जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये

niche ki line bahut gehri aur sateek baat kah gayi.


har sher lajawaab.

anjana said...

जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये

बहुत खूब....सुंदर रचना।

ई-गुरु राजीव said...

दिलचस्प तलाश है भाई !!
जीवन एक प्यास है
सभी को कुछ तलाश है.

Mrs. Asha Joglekar said...

प्यार से निराशा के बावजूद उसे पाने की ललक को क्या खूब बयां किया है । वाह रंजू जी ।
होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये।

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

"खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये"

नया दर्द प्यार जितना मीठा कहाँ होगा..

"नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये"

घोर कलयुग है.. मै तो प्रलय चाहता हू.. नये युगो का तभी आगाज़ होगा.. नये शहर तभी बसेगे..

"होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!"

वाह, बहुत रोमान्टिक ..सुन्दर..

दिलीप said...

achchi rachna aur janmdin mubarak...
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

Manoj Bharti said...

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएँ ...

संजय भास्कर said...

खत्म होने को है अब सब बातें प्यार की
अब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशिये

हमेशा की तरह सुंदर रचना। आभार।

पाती नेह भरी said...

नाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार में
जाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशिये

दिखता नही नज़रों में इजहार अब किसी भी बात का
अब कहाँ हर इंसान में यह रूप आप तलाशिये

जागती आँखो में ना पालिए अब कोई नया ख्वाब
समुंद्र से गहरे दिल का बस किनारा तलाशिये

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!



bahut khoob ji!!!

sadhuwaad!!!!

ab na rahega dil main mere
koi bhi apna ghar banakar
sab se kah do meet jaakar
ko makaaan duja talashoo!!!

मुकेश कुमार तिवारी said...

रंजना जी,

बहुत ही नाराजी भरी सी नज़्म बहुत कुछ कह जाती है बिल्कुल बीता हुआ सा।

आखिरी अशआर में तो जैसे रिश्तों को एक नई परिभाषा दी है, मुआफ कीजियेगा यह बात मुझे कुछ अपने हालातों सी लगी।

होते नही अब वो ख़फा भी मेरी किसी बात पर
प्यार पाने का उनसे कोई नया अंदाज़ तलाशिये!!

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी