Tuesday, June 17, 2008

मेरे लबों पर सहरा की प्यास रहने दे



मेरे लबों पर सहरा की प्यास रहने दे
इस दिल की लगी को यूं ही जलती बुझती रहने दे

मैं हूँ जो उदास तो क्यों तडपता है तेरा दिल
अभी कुछ देर और मेरे पास अपने अहसास रहने दे

मत देख कितने दर्द से भरा है मेरा दिल
उदास लबों पर यूं ही हँसी का लिबास रहने दे

ना नजरों से पिला तू मुझको प्यार के प्याले
मेरे नसीब में है जो खाली गिलास रहने दे

नही उम्मीद कि अब कोई थामेगा हाथ मेरा
मेरी आंखों में अब भी मंजिल की तलाश रहने दे !!



यह रचना मेरे द्वारा लिखित है और श्वेता मिश्र द्वारा गायी गई है जल्द ही मेरी लिखी कुछ रचनाओं की सी डी ऋषि जी द्वारा गयी भी आने की उम्मीद है आपको यह कैसी लगी जरुर अपने विचार यहाँ दे ..शुक्रिया
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