Tuesday, June 10, 2008

गुलजार जिनके लिखे गीत महकते हैं प्यार के एहसास से

हमारी हिन्दी फिल्में गानों के बिना अधूरी है ..कई गाने इतने अच्छे होते हैं कि यह फ़िल्म देखने पर मजबूर कर देते हैं ..किसी भी फ़िल्म की लोकप्रियता संगीत की धुन और उस में आए गानों के बोल भी होते हैं ..हमारी हिन्दी फिल्मों में यह परम्परा पारसी थियटर से आई और इसी परम्परा ने शायरों ,गीतकारों को सबके सामने रखा ।आज के लिखे जाने वाले गीतों से सबको शिकायत है कि पहले के गीत दिल को छूते थे पर आज कल के गीत गुब्बारे की तरह है जो आए और कब चले गए पता ही नही चलता कुछ जुबान पर चढ़ते हैं पर दिल में नही उतरते हैं ..पर आज के इस दौर में कई अच्छे गीतकार हैं जैसे जावेद अख्तर ,गुलजार .निदा फाज़ली आदि ..जिनके लिए लिखना सिर्फ़ तुकबंदी करना नही है ..वह लफ्जों में जान डाल देते हैं उसके अन्दर की गहराई को शिद्दत से महसूस करवाते हैं।

इसी कड़ी में गुलजार जी का नाम बहुत अच्छे से दिलो दिमाग पर असर करता है ।आम बोलचाल के लफ्जों को वह यूं पिरो देते हैं कि कोई भी बिना गुनगुनाए नही रह सकता है ..जैसे कजरारे नयना और ओमकारा के गाने सबके सिर चढ़ के खूब बोले .आज की युवा पीढ़ी खूब थिरकी इन गानों पर ।सच में वह कमाल करते हैं जैसे उनके गाने में आँखे भी कमाल करती है .उस से सबको लगता है कि यह उनके दिल कि बात कही जा रही है ।वह गीत लिखते वक्र जिन बिम्बों को चुनते हैं वह हमारी रोज की ज़िंदगी से जुड़े हुए होते हैं इस लिए हमे अपने से लगते हैं उनके गाने ।ओ साथी रे [ओमकारा] का गाना में तेरी मेरी अट्टी बट्टी ..दांत से काटी कट्टी ..जैसे लफ्ज़ को जादुई एहसास देना गुलजार जैसे गीतकार ही कर सकते हैं



प्यार और रोमांस से जुडा जो जादुई एहसास जो वो पिरोते हैं अपने लफ्जों में वह सबको अपने दिल के करीब सीधा दिल में ही उतरता सा लगता है ,अपने इन गानों से उन्होंने लाखो करोड़ों प्रेम करने वाले दिलो को शब्द दिए हैं। आज की युवा पीढ़ी के भावो को भी गुलजार बखूबी पकड़ कर अपने गीतों में ढाल लेते हैं ।उनके कुछ गीत हमेशा ही हर पीढ़ी में लोकप्रिय रहेंगे जैसे मेरा कुछ समान--- इजाजत ,इस मोड़ से जाते हैं तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नही ..आंधी,तुम पुकार लो .खमोशी ..रोज़ रोज़ आंखो तले फ़िल्म के सभी गाने आदि आदि अनेक गाने .लिस्ट तो बहुत लम्बी है उनके लिखे गानों की ।किस को यहाँ लिखूं किसको न लिखूं .मुझे सब बेहद पसंद है ..

..वह जो शब्द अधिकतर इस्तेमाल करते हैं रात ,चाँद ,पानी आदि उन्होंने इन शब्दों को बहुत से अलग अलग अर्थ दिए हैं ..वह शब्दों से जी ध्वनि पैदा करते हैं वह अर्थ हीन नही होती है रोमांस में डूबी उनकी हर कविता उनके लिखे हुए हर लफ्ज़ को और रोमांटिक एहसास से भर देती है ..हमेशा इनके लिखे का इंतज़ार रहेगा और इनके लिखे गाने सबके दिलों में गूंजते रहेंगे ....!!

अभी उन्ही का लिखा एक गाना सुनिए .मुझे यह बेहद पसंद है ..:)

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