Friday, March 21, 2008

यह तो रंग सजना प्यार का है


छलक रहा है जो रंग नजरों से
यह तो रंग सजना प्यार का है

दिल में उठ रही हैं जो धीरे से हिलोरे
यह नशा सब फागुनी बयार का है

उड़ा के ले गया है चैन-औ-करार मेरा
आंखो में ख्वाब इन्द्रधनुषी बहार का है

पलकों में बंद है बस एक सूरत तेरी
छाया हुआ खुमार तेरे ही दुलार का है

निहारूँ हर पल मैं राह तुम्हारी
नयनों को इन्तजार तेरे दीदार का है

बिखरे है फिजा में जो रंग टेसू के
ऐसा ही सपना तेरे मेरे संसार का है !!
Post a Comment