Tuesday, August 14, 2007

देख के सावन झूमे है मन



तीज का त्योहार .सावन की फ़ुहार , देश की आज़ादी को मानने का जोश और आसमान में उड़ती रंग बिरंगी पतंगे
दिल में एक नयी उमंग से भर देती है ..सब नया नया सा खिला खिला सा लगने लगता है
कुछ उमड़ धुमड के मनवा नये गीत रचने लगता है ..















देख के सावन झूमे है मन
दिल क्यूँ बहका लहका जाए
बादल की अठखेलियाँ बारिश की बूदें
मिल के दिल में उत्पात मचाए

भीगे मन और तन दोनो
ताल-तलैया डुबो जाए
देख के सब तरफ़ हरियाली
मयूर सा दिल नाचा जाए

छम-छम बाजे बूदों की पायल
गढ़ गढ़ बदरा शोर मचाए
बिजली की चमक पढ़े जब दिल पर
जिया पियु पियु की रट है लगाए

हवा हुई आज मनचली जैसे
छेड़ गोरी का आँचल छिप जाए
मीठी इन फुहारो से मनवा
गीत मिलन के आज गाए !!













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