Monday, July 02, 2007

मैं ख़्याल रखूँगी...


तुम प्यास की तरह मेरे लबों पे रहो..
मैं ख़याल रखूँगी की यह प्यास जगती रहे

बसे रहो मेरे दिल में सुरीला राग बन के
मैं ख़्याल रखूँगी यह धुन प्यार की बजती रहे

सजाओ मेरे आशियाँ को अपने ख्वाबो से
मैं ख़याल रखूँगी की यह रात सितारों सी चमकती रहे

प्यार की बरसती घटाओ को मुझ पे जम के बरसाओ
मैं ख़याल रखूँगी की यह सावन की रुत यूँ चलती रहे

ढल जाओ मेरे गीतो में प्यार का लफ्ज़ बन के तुम
मैं ख़्याल रखूँगी की एक आग इन लफ़्ज़ो में सुलगती रहे

कर दो अपनी पवन छुअन से मुझ पत्थर को पारस
मैं ख़्याल रखूँगी की धड़कनो में धुन तेरे नाम की बजती रहे

ज़िंदगी ना लगे कभी यूँ ही बेवजह सी जीती हुई सी
मैं ख़याल रखूँगी की जीने की आस दिल में पलती रहे

कब चल पाया है यह संसार नफ़रत की बातों से
मैं ख़्याल रखूँगी की प्यार की शमा दिल में जलती रहे !!
Post a Comment