Monday, June 18, 2007

यह भीगा सा मौसम



सावन की यह भीगी सी बदरिया
बरसो जा के पिया की नगरिया

यहाँ ना आके हमको जलाओ
अपने बरसते पानी से यूँ शोले ना भड़काओ

उनके बिना मुझे कुछ नही भाये
सावन के झूले कौन झुलाये

बिजली चमक के हमे ना डराओ
बिन साजन के दिल मेरा कांप जाये

उलझा दिए हैं बरस के जो तुमने मेरे गेसू
उनको अब कौन अपने हाथो से सुलझाए

यह बिखरा सा काजल,यह चिपका सा आँचल
अब हम किसको अपनी आदओ से लुभायें

रुक जाओ आ बहती ठंडी हवाओं
तेरी चुभन से मेरा जिया और भी तड़प सा जाये

मत खनको बेरी कंगना,पायल
तुम्हारी खनक भी अब बिल्कुल ना सुहाये

सब कुछ सूना सूना है उनके बिना
मुझको यह बरसती बदरिया पिया के बिना बिल्कुल ना भाये!!

12 comments:

Mohinder56 said...

उलझा दिए हैं बरस के जो तुमने मेरे गेसू
उनको अब कौन अपने हाथो से सुलझाए

यह बिखरा सा काजल,यह चिपका सा आँचल
अब हम किसको अपनी आदओ से लुभायें

सावन की फ़ुहार से शिकायत
बहुत प्यारी लगी
आपकी कविता की बनावट
बहुत प्यारी लगी

Divine India said...

आहSSSS मधुर संगीत की नाव…शब्दों की कल-कल…भावनाओं का बहाव…बस ढूंढते हुए खोजी मन का तलाश है वह छोटा सा गाँव।
कहाँ जाकर रुकेगी आपकी नैया बस किनारों तलक पहुंचाये ये मधुरता की मिठास…

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया और सुंदरता से बही पूरी रचना. बधाई.

शैलेश भारतवासी said...

क्या बात है? आषाढ़ में सावन की बात हो रही है, मगर सच कहूँ कविता में इतना रस है कि लगने लगा कि सावन आ गया।

Unknown said...

wow !!!!!!!!!!!!!!!1
yah bhiga sa mausammmmmmmmmmmmmmmm

padkar bahut achha laga mam.....
ye lag raha hai bilkul mere liye hai....yani premlata ke liye...ha ha ha.....pl.dnt.mind...
bahut bahut dhanybad mam....aapko premlata ke taraf se uuuuuuummmmm

डाॅ रामजी गिरि said...

Ranju ji,
aapne barish ke mausam ki bechaini par khoobsoorat kavita likhi hai. sundar bhav hain.

Sanjeet Tripathi said...

"यह बिखरा सा काजल,यह चिपका सा आँचल
अब हम किसको अपनी आदओ से लुभायें

रुक जाओ आ बहती ठंडी हवाओं
तेरी चुभन से मेरा जिया और भी तड़प सा जाये"

वर्षा का विरह…… जब बारिश की बूंदें भीगोकर शीतल करने की बजाय विरहाग्नि को और बढ़ा जाएं!!

शानदार कविता!!

Anonymous said...

nice writing ranju. But it is same voice have been hearing for long...

महावीर said...

ऐसी रचना जोः
आंखों के रास्ते से दिल में उतर गई!
बहुत सुंदर रचना है।
बधाई स्वीकारें।

ख्वाब है अफसाने हक़ीक़त के said...

Bahut khubsurat rachna hai,bahut hi sunder bhaav hai, jab ki ye rachna meri pasand se hat kar hai, per mujhe bahut achhi lagi. Badhaai...

Unknown said...

Saawan aane ki ghanti baja di hai aapne ranju ji...!!

Mukesh Garg said...

ranju ji bahut sunder rachna hai pad kar esa laga ki aaj barish na hokar bhi barish ho rahi hai.