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Wednesday, September 01, 2010

राधा -मीरा


  • जिस को देखूं साथ तुम्हारेमुझ को राधा दिखती हैदूर कहीं इक मीरा बैठीगीत तुम्हारे लिखती है
    तुम को सोचा करती हैआँखों में  पानी भरती है उन्ही अश्रु की स्याही से लिख के खुद ही पढ़ती है
    यूँ ही पूजा करते करतेकितने ही युग बीत गये बंद पलकों में ही न जाने कितने जीवन रीत गये खोलो नयन अब अपने कान्हा पलकों में तुम को भरना हैपूजा जिस भाव  से तुम्हे उसी से प्रेम अब तुमसे करना है
    आडा तिरछा भाग्य है युगों सेतुम इसको सीधा साधा कर दोअब तो सुधि लो  मेरे कान्हामीरा को राधा कर दोहाथ थाम लो अब तो कृष्णा इस भव सागर से पार तुम कर दो ...


Thursday, May 29, 2008

वक्त और रिश्ता


कौन कहता है कि..
हो जाता है एक नज़र में प्यार
दो दिल न जाने कब एक साथ
धड़कने लगते हैं...
तोड़ लायेंगे चाँद सितारे
और बिछा देंगे फलक
क़दमों के नीचे
ऐसे सिरफिरे वायदे भी
कसमों की जुबान होते हैं,

पर सब खो जाता है
कुछ ही पलों में...
वो दर्द को छूने की कोशिश..
वो इंतज़ार के बेकली के लम्हे..
आंखो में सजते सपने..
आग का दरिया तक
पार करने का जनून
न जाने कहाँ चला जाता है ?

रह जाता है तो सिर्फ़
एक भोगा हुआ वक्त
जो दो जिस्मों
मैं बंट कर
सिर्फ़ ...एक
पिघला हुआ एहसास
रह जाता है !!

Monday, May 05, 2008

कुछ यूं ही चंद लफ्ज़

राज़

यादों से भरे बादल को
वक्त की हवा उडाये जाती है
पीड़ा आंखो से बस यूं ही
बरस बरस जाती है
छा जाती है नर्म फूलों
सोई उदासी भी
सन्नाटे में धड़कन भीएक राज़ बता जाती है !!


आस की किरण

आस की किरण
बोली मुझसे कि
बसने दे
अपने दिल में
सजने दे आशियाना
मिटा दूँगी तमस
तेरे मन का
और भर दूँगी दरार
जिसमें से छन कर
मैं तेरे दिल तक पहुँच रही हूँ...

Monday, April 28, 2008

हमराह



कभी राह का हर निशान
हर पेड़ और हर पत्ता
खिलते फूलों की महक,
बहती मीठी मंद बयार
आसमान पर खिलता चाँद
और अनगिनत चमकते सितारे
मिल के हमने ...
एक साथ ही तो देखे थे...
तब से इन्ही अधखुली आंखों में
मेरी नींद तो क्वारी सो रही है
पर
जन्म दिया है ...
उन्ही अधूरे ख्यालों ने
सपनो को
जो दिन ब दिन
पल पल कुछ तलाश करते
आज भी तुझे हमराह बनाने को
उसी मंजिल को दिखा रहे हैं !!

Friday, March 21, 2008

यह तो रंग सजना प्यार का है


छलक रहा है जो रंग नजरों से
यह तो रंग सजना प्यार का है

दिल में उठ रही हैं जो धीरे से हिलोरे
यह नशा सब फागुनी बयार का है

उड़ा के ले गया है चैन-औ-करार मेरा
आंखो में ख्वाब इन्द्रधनुषी बहार का है

पलकों में बंद है बस एक सूरत तेरी
छाया हुआ खुमार तेरे ही दुलार का है

निहारूँ हर पल मैं राह तुम्हारी
नयनों को इन्तजार तेरे दीदार का है

बिखरे है फिजा में जो रंग टेसू के
ऐसा ही सपना तेरे मेरे संसार का है !!

Wednesday, January 16, 2008

रेत से गीले पल


ज़िंदगी तो मिल जाती हैं सबको चाही या अनचाही
बीच में मिल जाते हैं ना जाने कितने अनजान राही

बिताते हैं कुछ पल वोह ज़िंदगी के साथ साथ
कुछ मीठे- कड़वे पलो की सौगाते दे जाते हैं

यह ज़िंदगी का खेल बस वक़्त के साथ यूँ ही चलता जाता है
बचपन जवानी में ,जवानी को बुढ़ापे में तब्दील कर जाता है

सब अपने सुख दुख समेटे इस ज़िंदगी को बस जीते जाते हैं
बह जाते हैं यह रेत से गीले पल फिर कब हाथ आते हैं !!
रंजू

Friday, January 04, 2008

टीस


दिखे जब रंग इन्द्रधनुष के
कुछ स्वप्न भूले बिसरे याद आए
दे के दर्द गए वह पवन के झोंके भी
जब हौले से वह यूं छु जाए

चुभी दिल में कोई फाँस सी
जब कोयल कुहू कुहू गाए
हर बीता मौसम दे याद तुम्हारी
पर गुजरा वक्त कब हाथ है आए

टीस दे इस दिल को हर वो लम्हा
जो गुजरा तुम संग साथ बीताये
भेजे कई मिलन के संदेशे हमने
दिल की बात तुम समझ न पाये

न न मत अब सहलाना
कोई दिल का दाग तुम अब मेरा
जब तक दिल में .......
यह विरह की टीस घनेरी
तब तक हैं यादों में तेरा बसेरा
हर चुभती बात में याद आए तुम
हर दर्द में दिखे चेहरा तेरा
रहने दो अब टीस यह दिल में
यूं तो रहेगा साथ तेरा मेरा !!