Saturday, November 30, 2019

माँ ,नारी का सबसे सुंदर रूप ( भाग 2)

कहीं पढ़ा था कि ‘‘जब तुम बोल भी नहीं पाते थे तो मैं तुम्हारी हर बात को समझ लेती थी और अब जब तुम बोल लेते हो तो कहते हो कि माँ तुम कुछ समझती ही नहीं।’माँ साथ नहीं पर वह तब भी हर पल साथ महसूस होती है ,फिर भी एक स्नेह्हिल स्पर्श की जब जब जरूरत महसूस होती है तो यह शिकायत अपनी बात यूँ कह जाती है 

तुम तो कहती थी माँ कि..
रह नही सकती एक पल भी
लाडली मैं बिन तुम्हारे
लगता नही दिल मेरा
मुझे एक पल भी बिना निहारे
जाने कैसे जी पाऊँगी
जब तू अपने पिया के घर चली जायेगी
तेरी पाजेब की यह रुनझुन मुझे
बहुत याद आएगी .....


पर आज लगता है कि
तुम भी झूठी थी
इस दुनिया की तरह
नही तो एक पल को सोचती
यूं हमसे मुहं मोड़ जाते वक्त
 तोड़ती मोह के हर बन्धन को
और जान लेती दिल की तड़प
पर क्या सच में ..
उस दूर गगन में जा कर
बसने वाले तारे कहलाते हैं
और वहाँ जगमगाने की खातिर
यूं सबको अकेला तन्हा छोड़ जाते हैं


1 comment:

Deeshu krishna said...

Bhut khub bda anandmayi hai aapke lekh

Hall hi me maine bollger join kiya hai aapse nivedan hai ki aap mere post padhe aour mujhe sahi disha nirdesh de
https://shrikrishna444.blogspot.com/google96bd1e61f6ac4874.html
Dhanyawad