Tuesday, June 30, 2015

स्पर्श

"नन्हा सा गुल खिलेगा अंगना ," यह गाना अमर हर वक़्त गुनगुना के राशि को सुनाता रहता और राशि आँखों में चमक भर के देख के मुस्कराती रहती ,दोनों अपने घर आने वाले नए मेहमान के इंतज़ार में एक एक पल गिन  रहे थे। राशि ,अमर का हाथ अपने पेट पर रख कर उसको आने वाले बच्चे की धड़कने सुनाती रहती ,दिन करीब थे ,राशि चेकअप के लिए गयी इस बार तो डॉ ने कहा तुम्हे एडमिट होना होगा बच्चे  हार्टबीट्स कुछ नार्मल नहीं लग रही है ,वैसे घबराने वाली  कोई बात नहीं। पर कुछ गड़बड़ न हो इस लिए एडमिट की बात कह रही हूँ ,अमर की तबियत पिछले दो दिन से ठीक नहीं  थी ,बुखार चढ़ उतर रहा था ,राशि अमर को अकेले इस हालत में छोड़ने को तैयार नहीं थी ,पर अमर ने कहा घबराने की बात नहीं मैं ठीक हो जाऊँगा तुम अपना और बच्चे का ध्यान रखो ,राशि ने बुझे मन से हां की और अमर घर से उसका सामान लाने   चल पड़ा ,हॉस्पिटल के मुख्य द्वार तक पहुँचते ही उसको तेज हार्ट अटैक हुआ और जब तक डॉ देखते अमर को वह यह दुनिया छोड़ चुका था ,डॉ ने बहुत हिम्मत करके राशि को यह खबर सुनाई ,राशि के साथ खड़े अमर के माता पिता भी जैसे बेजान हो गए ,यह क्या हो आया पल में ही ,तभी राशि की कही बात ने सबको चौंका दिया यही या ,डॉ साहब अमर के शरीर के जो भाग दूसरे किसी के  काम आ सकते हैं मैं वो पत्नी होने के नाते डोनेट करना चाहती हूँ और जब आप यह कार्य कर ले ,मैं अमर से मिलना चाहती हूँ ,डॉ हतप्रभ थे पर यह एक नेक इच्छा थी जो" अमर "को वाकई "अमर "कर रही थी ,.
डॉ अपना कार्य  उसके जो भी अंग दूसरे के काम आ सकते थे अमर के शरीर से ले लिए ,तभी राशि को लेबर पैन शुरू हो गयी ,लेबर रूम जाते हुए "राशि "को "अमर "से मिलाया गया और राशि ने अमर का बेजान हाथ अपने पेट पर रख कर कहा ,"बच्चे यह तुम्हारे पापा का आखिरी स्पर्श है ,इसको दिल से महसूस करो, वो हमेशा तुम्हारे साथ है !"

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