Sunday, June 28, 2015

"खूबसूरत रिश्ते

देखा है
बारिश में पनप जाते हैं पौधे बिना जड़ के भी
सोचती हूँ इसी ख्याल में .
कि इस बार तुम्हारे दिए "स्नेह" को भी
रोप दूँ अपने "दिल के आँगन की क्यारी " मे..
और पनप जाए वो "खूबसूरत रिश्ते" में
बढ़ता रहे फिर वह
दोनों के स्नेह की खाद और हवा से
इसी उम्मीद में
कि एक दिन महक उठेगा यह भी
खिलती बगिया सा दिल में .............
 
 
अभी कुछ यूँ ही बेतुका सा ख्याल बाहर आँगन में पौधो को देखते  हुए ...:) # रंजू भाटिया
 

4 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, मटर और पनीर - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Unknown said...

बहुत प्यारा खयाल। रिश्ते का पौधा लहलहाये, महके, चहके।

रचना दीक्षित said...

खूबसूरत रिश्ते यूँ ही खूबसूरत बने रहें

#ABCD💝 from Banda, UP said...

बहुत सुंदर