Friday, May 22, 2015

जादुई लम्हे




कुदरत के यह रंग
"हरा" उम्मीदों वाला
"आसमानी" सपनो का
 गुलाबी, लाल "बदरंग ढलवां छत्तों पर
टप- टप  गिर के ठिठकी खड़ी हैं "पानी की बूंदें "
करीब   से  गुजरते हुए यह बादलों के काफिले
 कांपती हुई हवा की सरगोशियाँ
पेड़ों की टहनी से लिपटती हटती
 इसी को महसूस कर
मैंने भी सिमट कर खुद को ओढ़ लिया है
तेरी 'निग्गी यादों में ,
और कहा है
 इन जादुई बीतते लम्हों   को
फिर आना ,"कोई और भी इन वादियों के रुपहले वक़्त को अपने गीतों में बुनता है !"
#ranjubhatia
photo courtesy Ashok gupta

6 comments:

Anjali Sengar said...

Nice poem :)

http://zigzacmania.blogspot.in/

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, संत वाणी - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Tushar Rastogi said...

आपकी इस पोस्ट को शनिवार, २३ मई, २०१५ की बुलेटिन - "दी रिटर्न ऑफ़ ब्लॉग बुलेटिन" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद।

dj said...

सुन्दर जादुई लम्हें

Preeti 'Agyaat' said...

Sundar ehsaas !

Onkar said...

सुन्दर प्रस्तुति